शुक्रवार शाम करीब 4.15 बजे केंद्रीय मंत्री हरीश रावत एक सौ लोगों के जत्थे के साथ बेस कैंप केदारनाथ पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि समय कम है, तैयारियां भी कम ही हुई है। नंवबर तक ही काम हो सकेंगे। ऐसे में अस्थायी काम तेजी से पूरे कर लिए जाने चाहिए।
गौरीकुंड से प्रात: 6.30 बजे बाबा केदार के लिए पैदल रवाना हुए केंद्रीय मंत्री रावत दोपहर सवा एक बजे मीलचौली पहुंचे। यहां पर खाना खाने के बाद वह कुछ देर रुके। पौने तीन बजे वहां से केदारनाथ के लिए प्रस्थान किया।
पैदल और कुछ स्थानों पर खच्चर से रावत सवा चार बजे बेस कैंप केदारनाथ पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि अगले यात्रा सीजन शुरू होने से पहले तैयारियों के लिए कुछ ही वक्त मिल पाएगा, जिससे कार्यों को पूरा करना जरुरी है। अगली यात्रा बीते वर्षों की भांति होनी चाहिए।
दो हजार लोगों के ठहरने की व्यवस्था होनी चाहिए
देश, विदेश से आने वाले यात्रियों के पास ऐसा कोई भी संदेश नहीं जाना चाहिए कि हमारी तैयारियों कम हैं। उन्होंने डीएम को निर्देश दिए कि केदारनाथ में दो हजार लोगों के ठहरने की व्यवस्था होनी चाहिए।
कहा कि केदारनाथ यात्रा के लिए गुप्तकाशी में पीडब्लूडी का डिवीजन खोलकर एसई और ईई की तैनाती कर ली गई है। उन्होंने पैदल रास्तों का निर्माण के लिए भी तय मानकों के तहत करने की बात कही।
कहा कि पैदल मार्ग का ग्रेडियेंट 1-12 से अधिक नहीं होना चाहिए। गौरीकुंड से सामने की ओर भी रास्ते का विकल्प देखा जाना चाहिए। वर्ष 2014 की यात्रा बेहतर होनी चाहिए।
एक ही हेलीकॉप्टर पहुंचा धाम
शुक्रवार को गुप्तकाशी हेलीपैड से केदारनाथ एक ही हेलीकॉप्टर पहुंचा। जबकि मेहलचौली में चापर से सामान उतारा गया, जिसमें बिस्तर, चारपाई और लंगर का सामान शामिल था।
हाथ-मुंह धोने भी मुश्किल
शुक्रवार को बाबा केदार के धाम में शाम पांच बजे से घना कोहरा छा गया था, जिससे दस मीटर की दूरी तक देखना भी संभव नहीं था। इस दौरान हल्की बूंदाबांदी भी होती रही। यहां ठंड बढ़ने से पानी बहुत ठंडा हो गया है, जिसके चलते हाथ, मुंह धोने में भी खासी मुश्किलें हो रही हैं।
लंगर में नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था
गौरीकुंड से केदारनाथ तक जाने वाले रास्ते के मध्य मीलौली में शांतिकुंज के स्वयं सेवियों ने नि:शुल्क लंगर लगाया हुआ है। लोग यहां पर भोजन कर आगे बढ़ रहे हैं।
43 लोगों ने किया पंजीकरण
शनिवार पहले नवरात्र से बाबा केदारनाथ की यात्रा के फिर से शुरू होने पर 43 यात्रियों ने पंजीकरण किया। इन यात्रियों में अधिकांश लोग वे हैं, जो जून में आई आपदा में बाबा केदार के धाम में अपनों को खो चुके थे। इधर यात्रा को लेकर आम आदमी में कोई खास उत्साह देखने को नहीं मिल रहा है।