चंपावत जिले की राजनीति में आए नए चेहरे ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जीवन के 52 बसंत देख चुके इस अधेड़ नौजवान की आंखों में भविष्य के सुंदर सपने है, कुछ नया करने का इरादा हैं, पहाड़ जैसी संकल्प शक्ति एवं हर दृष्टि से समृद्ध एवं संपन्न व्यक्ति का इतना आत्मीय व्यवहार है कि जिससे भी यह बात कर रहे है, वह उनका मुरीद होता जा रहा है। इस व्यक्ति के व्यक्तित्व में इतनी विराटता, आत्म विश्वास, आत्म मंथन, आत्म संयम एवं जज्बा है कि हर व्यक्ति इनकी ओर खिंचता जा रहा हैं। बहुत कम समय में इन्होनें गांव-गांव की रामलीलाओं में जाकर लोंगों से जो अपने मन की बात कही है उससे इनके समर्थकों व प्रसंशकों की लगातार संख्या बढ़ती जा रही है। जिस व्यक्ति ने इनके बारे में सुना है वह इन्हे देखना व सुनना चाहता है। उच्च शिक्षा प्राप्त व्यक्ति जिसका जीवन महानगरों में बीता है। उसे अपने लोगों के बीच अपनी भाषा में बोलने में गर्वानुभव होता है। यह वही पाटी के मैरोली गांव में जन्में एवं यही के प्राईमरी विद्यालय के बाद चंपावत में शिक्षा लेने वाले नरेन्द्र सिह लडवाल है, जिन्हें लोग आदर से नरेन्द्र भाई कहते है। यह वही नरेन्द्र भाई है, जो दिल्ली हरियाणा, पंजाब आदि कई स्थानों में जिनका अपना कारोबार है। जो भले ही वहां रहते हो लेकिन इनकी आत्मा अपनी माटी में रची बसी हुई है। नरेन्द्र भाई को भले ही कम लोगों ने देखा हुआ है। लेकिन यह यहां की सामाजिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक, खेल एवं अन्यान्य कार्यक्रमों व गतिविधियों से सदा जुड़े हुए है। प्रचार प्रसार से दूर रहने वाले नरेन्द्र भाई की अघोषित सेवाओं के वे सैकड़ों गरीब लोग प्रतिवर्ष गवाह बनते जा रहे है। जिनकी बेटियों के हाथ पीले करने, मेधावी गरीब बच्चों का सहारा बनकर उन्हें उनकी प्रतिभा के बल पर सफलता के शिखर में पंहुचाने के साथ दिल्ली, हरियाणा आदि स्थानों में आप प्रवासी पर्वतीयों के लिए एक सच्चे हितैषी एवं हमदर्द के रूप में काम करते आ रहेें है। एकाएक ऐसे व्यक्ति के जिले की राजनीति में सक्रिय होने से जहां चंपावत विधानसभा हाट सीट की चर्चा में आ गई है। वहीं इनकी खुली सक्रियता से यहां के चुनावी समीकरणों केा भी उड़ेल कर रख दिया है। लोगों की प्राथमिकताएं बदलती जा रही है। बुद्धिजीवियों का कहना है कि ऐसे व्यक्ति को अपना नुमाइंदा बनाने में स्वमं उनका सीना चौड़ा होगा। ऐसे बहुमुखी प्रतिभा के धनी नरेन्द्र भाई ने अत्यंत व्यस्तता के बावजूद तमाम सवालों का बड़ी विनम्रता और बेबाकी से जबाव दिया।
प्रश्न - लडवाल साहब ईश्वर ने आप पर नियामतें बरसाई है, आप हर दृष्टि से सक्षम एवं सबल है। आप का सक्रिय राजनीति में आने का विचार क्यों और कैसे पैदा हुआ?
उत्तर - मुझे लगता है कि मैं अपनी क्षमता व व्यक्तिगत प्रभाव से लोगों की जो अघोषित सेवा करता आ रहा हूं। उससे मैं स्वयं संतुष्ट नहीं हूं। समाज के लिए बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। जिसके लिए राजनीति एक मजबूत संबल होती है। चंपावत जिले में विकास की अपार संभावनाएं है। यहां पर्यटन, साहसिक पर्यटन, जड़ी बूटी उत्पादन, फूलों की खेती, बागवानी आदि के जरिए यहां रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकतें है। पहाड़ के गांव उजड़ रहे है। तेजी से लोग अपनी माटी से अलग होते जा रहे हैं। मेरा इरादा जंगली जानवरों से खेती छोड़ रहे किसानों के उत्पादन की प्राथमिकताएं बदलकर यहां जड़ी बूटी की व्यावसायिक खेती शुरू कर गांवों को पुन: बसाने तथा बंजर खेतों को आबाद किया जाएगा। चंपावत इस दृष्टि से एक ऐसा माडल जिला बनेगा। जिसकी मिशाल उत्तराखंड के अन्य पर्वतीय जिलों के लोग लेकर इन कार्यक्रमों को अपने यहां अपनाएंगें।
प्रश्न - आप पाटी ब्लाक के रौलमैल जैसे सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में पैदा हुए है। आप के साथ पढ़े हुए लोग अपनी जगह पर है। लेकिन आप ने साधनों व संसाधनों के घोर अभाव के बावजूद सफलता के जो कीर्तिमान अर्जित किए है, इसका क्या राज है?
उत्तर - मैं अपने को शिक्षक का बेटा होने पर स्वयं को भाग्यशाली मानता हुं। शिक्षक की बेटी रही मेरी मां व पिता को हम तीन भाई बहिनों को अधिक समय तक सेवा करने का ईश्वर ने अवसर नहीं दिया लेकिन उनके द्वारा दी गई शिक्षा व संस्कार मेरे जीवन पथ को आलोकित करते आ रहे है। मेरे नाना, मामा एवं अन्य परिजनों के शिक्षक होने एवं शैक्षिक पृष्ठभूमि में जीने का अवसर मिलने से मुझे शिक्षा के साथ ऐसे संस्कार मिले है कि मैंनें अपने जीवन को कठोर परिश्रम, ईमानदारी, सकारात्मक एवं सृजनात्मक सोच के साथ उद्यम के क्षेत्र में प्रवेश किया। मेरे पूज्य माता पिता, गुरूजनों, बुजुर्गों के आर्शीवाद की शक्ति ने मेरा हौसला बढ़ाने के साथ कारेाबार भी बढ़ता गया। इस सफलता का सबसे बड़ा राज मेरे ऊपर ईश्वर व ईष्ट देवताओं की महान कृपा रहीं है।
प्रश्न - आपका कार्य क्षेत्र दिल्ली, गुडग़ांव, पंजाब आदि कई स्थानों में है। जहां आपका अच्छा कारेाबार है। हजारों लोगों की आपके बलबूते रेाजीरोटी चली हुई है। आप ने क्यों चंपावत विधानसभा सीट से ही चुनाव लडऩे का ईरादा बनाया है?
उत्तर - देखिए मेरा कारोबार उत्तराखंड समेत देश के विभिन्न स्थानों मेंं फैला हुआ है। किसी व्यक्ति की जन्मभूमि तो स्थान विशेष ही होती है। जहंा से उसने शिक्षा पाई हो। उस स्थान को वह कभी नहीं भूल सकता। जन्मभूमि का मोह एवं यहां के लोगों का निश्च्छल प्रेम मुझे यहां खींच लाया है। मसूरी, भीमताल व चंपावत में होटल उद्योग, सिंतारगंज में एक हजार नाली भूखंड में बच्चों का ऐसा मॉडल आवासीय स्कूल बनाया जा रहा है। जिसकी उत्तराखंड में विशिष्ठ पहिचान होगी। चंपावत में सौ नाली भूमि में भी एक उच्च कोटि का आवासीय स्कूल खेालने का मन बनाया हैं। जो नैनीताल के स्कूलों की तरह चंपावत की अलग पहिचान बनाएगा। जहां तक चंपावत से चुनाव लडऩे का सवाल हैं। यदि में अपनी क्षमता व ऊर्जा का दोहन अपने क्ष्ेात्र एवं अपने लोगों के विकास में न करूं तो यह उन लोगों के लिए अन्याय होगा, जिनके बीच रहते हुए मैने अपना बचपन हंसते खेलते बिताया है। मेरे मामा स्वर्गीय लक्ष्मण सिंह मेहता जिनका जीवन समाज सेवा के लिए समर्पित था, उन्हीं के सानिंध्य में मैंने जीआईसी चंपावत से पढ़ाई की। कारोबार तो विभिन्न स्थानों में फैला है, लेकिन वहां बचपन का परिवेष, साथी, ईष्ट देवता, ईष्ट मित्र, अपनी भाषा बोलने वाले स्नेहीजन, आर्शीवाद देने वाले आमा-बूबू व मास्साब नहीं है।
प्रश्न - आपने अपने क्षेत्र के लोगों के लिए ऐसे कौन से काम किए है। जिसे देखकर वह आप को ही वोट देने मूड बनाए होगें?
उत्तर - देखिए मैं अपने क्षेत्र के लोगों के दुख सुख का भागीदार बनने के साथ अपनी माटी से जुड़ा रहा हुं। मैंने लेागों के लिए व्यक्तिगत तौर पर क्या किया वह प्रचार का विषय नहीं है। हां इतना जरूर कहुंगा कि मैंने अपने कार्यों से लोगों की इतनी सद्भावनाऐं व दुआऐं बटोरी है। जो मेरे लिए बहुत बडी पूंजी है। बेरोजगारी मेरी बहुत बड़ी दुश्मन रहीं है। आज उत्तराखंड के दो हजार से अधिक लेाग मेरे विभिन्न प्रतिष्ठानों में रोजगार से जुड़े है। मैंने समय समय पर मल्टीनेशनल कंपनियों के अधिकारियों को यहां भेजकर कैंम्पस इंटरव्यू कराकर चंपावत, टनकपुर, खेतीखान आईटीआई के बच्चों को रोजगार दिलाया है। पिछले वर्ष मैनें चंपावत स्थित अपने होटल सी हॉक में जापानी कंपनी से बच्चों का इंटरव्यू दिलाकर युवक व युवतियों को कंपनी से जोड़ा है।
प्रश्न - आप अपने क्षेत्र में युवकों को रोजगार एवं उन्हें सही दिशा देने के लिए आपके पास क्या कार्यक्रम एवं योजनाएं है?
उत्तर - आज सबको सरकारी नौकरी मिलना संभव नहीं है। इसके चक्कर में रहते हुए युवकों को अपना समय बर्बाद न कर वे खेत से जुडऩे का प्रयास करें। खेत प्रकृति का ऐसा माध्यम हैं जहां एक दाना बोने पर सौ दाने पैदा होते है। हम लोग बागवानी के क्षेत्र में पहले से कार्य कर रहें हैं। ऐसी बागवानी जो तीन साल में सेब के पेड़ फलों से लदेगें, इसी के साथ मौन पालन कार्यक्रम चलेगा। जिन युवकों व युवतियों को तकनीकी हुनर होगा उन्हें उद्योगों से जोड़ा जाएगा। दिल्ली, मुम्बई आदि स्थानों से पर्यटकों का रूख यहां के तीर्थों, प्रमुख पर्यटक स्थलों की ओर होगा। इन स्थानों से हेली सेवाएं चलेगीं। यहां उपलब्ध संसाधनों के आधार पर उद्योग स्थापित कर रोजगार के अवसर पैदा किए जाएगें। यहां के पॉलिटेक्निक, आईटीआई एवं इंजीनियरिंग कॉलेजों में ऐसे ट्रेड संचालित किए जाएगें। जहां युवकों को पढ़ाई के साथ ही नौकरी के ऑफर मिलने लगेगें। मेरे मन में क्षेत्र के विकास के लिए तमाम ऐसी योजनाऐं है। जो क्षेत्र की तस्वीर एवं लोगों की तकदीर बदल देगी। मैं झूठें वायदें न कर कर्म में विश्वास करता हुं।
प्रश्न - लडवाल साहब आप स्वयं बड़े उद्योगपति है। आप चंपावत जिले में उद्योगों की क्या संभावनाएं देखते है?
उत्तर - चंपावत जिले की अलग भौगोलिक परिस्थियां हैं। यहां बड़े कारखानें नहीं कुटिर उद्योगों की अपार संभावनाएं है। स्थानीय कच्चे माल की उपलब्धता के आधार पर यहां छोटे उद्योग स्थापित किए जा सकते है। यहां उत्पादित उत्पादों की मार्केटिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। जिसके लिए वे दिल्ली की मदर डेरी से संपर्क करेगें। क्षेत्र में जैविक सब्जियों एवं उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा। जिनकी दिल्ली के बाजारों में कई गुना अधिक किमतें मिलती है। यहां माल्टा, नींबू, संतरा बेहिसाब होता है। लेकिन उत्पादकों को कोई लाभ नहीं मिलता। इसके लिए दिल्ली से मदर डेरी के लोग यहां से फलों का ही नहीं दूध, सब्जी, फूल खरीद कर लोगोंं को उचित मूल्य दिलाएगें। यहीं नहीं यहां के दूध के साथ गौमूत्र की भी दिल्ली के बाजारों में धूम मचाई जाएगी। उत्पादक गांवों को सड़क व सिंचाई सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। दरअसल यहां आज तक लोगों में औद्योगिक मानसिकता ही तैयार नहीं की गई है। हमारे इस क्षेत्र में सब कुछ है। लेकिन हम में यह जज्बा पैदा नहीं किया गया कि हम मालिक बनकर दूसरों को रोजगार देने का माध्यम बनें। मैं लोगों में नौकरी नहीं मालिक बनने के लिए प्रेरित कर उनकी सफलता के पंख लगाऊंगा।
प्रश्न - आज राजनीति की पवित्रता समाप्त होती जा रही है। बगैर छल प्रपंच, झूठ बोले, एवं तिगडम भिंडाकर काम लेने की कार्य संस्कृति बन चुकी है। आप जैसे सरल प्रवृत्ति के व्यक्ति क्या ऐसे राजनैतिक परिवेष में अपनी जगह बना पाऐगें?
उत्तर - सवाल अहम है। मैं माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी का व्यक्तिगत प्रशंसक एवं मुरीद हुं। उन्हें मैं अपना प्रेरणास्रोत मानते हुए उन्हीं की भावनाओं से आत्मसात कर रचनात्मक एवं सकारात्मक सोच के साथ राजनीति में कदम रख रहा हुं। मैं मानता हूं कि व्यवस्था में काफी दोष है। लेकिन यदि जानकार लोग ही इस व्यवस्था को ऐसे ही छोड़ देगें तो देश का क्या होगा? माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में चल रही केंद्र सरकार ऐसे काम कर रही है। जिसकी लोगों ने कल्पना तक नहीं की थी। आज के समय में बेदाग सरकार चलाना कितना मुश्किल है। इसे सभी जानते है। लेकिन मोदी जी द्वारा दृढ़ इच्छाशक्ति एवं चट्टानी इरादों के बल पर ऐसी लोकप्रिय सरकार का संचालन किया जा रहा हैं, जिसमें भ्रष्टाचार के आजतक कोई आरोप नहीं लगे है। मैं इसी प्रकार की व्यवस्था उत्तराखंड में लाने का पक्षधर रहा हुं। अपनी नीति और नियत साफ होनी चाहिए। कोयले की खान में रखा हीरा अपनी अलग ही चमक देता है। हमें मन से सोचना होगा कि जो होगा अच्छा होगा ,जो करेगें अच्छा करेगें।
प्रश्न - आपने अन्य राष्ट्रीय दलों को छोड़कर भाजपा को ही चुना है। इस पाटी में कौन सा शहद लगा हुआ है?
उत्तर - मैं आपको पहले ही बता चुका हुं कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की नेतृत्व क्षमता, दूर दृष्टि एवं देश को पुन: विश्व गुरू के वैभव को दिलाने की दिशा में जो कार्य किए जा रहे है। उसका गवाह पूरा देश है। उन्हेांने देश की राजनीति की भाषा व शैली का मतलब ही बदल दिया है। देश की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए भाजपा ही एक मात्र ऐसा राष्टï्रीय दल हैं, जिसके हाथों में देश हमेशा सुरक्षित रहेगा। यदि ईश्वर ने चाहा तो माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में देश ऐसे परिवेश की ओर बढ़ता जा रहा है। जहां लोगेां के चेहरों की मुस्कान देश की खुशहाली की पहचान होगी।
प्रश्न - दिल्ली में रहते हुए आपके भाजपा के शीर्ष नेताओं से कभी कोई संबंध रहे है?
उत्तर - मुझे भाजपा के सभी छोटे बड़े नेताओं का हमेशा सहयोग, समर्थन एवं आशीर्वाद मिलता रहा है। मैं उन संबंधों को चंपावत जिले के विकास के लिए दोहन करना चाहता हुं। उत्तराखंड के विकास के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी की भावनाओं एवं आंकाक्षाओं के अनुरूप यहां भी वैसी ही सरकार बने, इसकी चाहत हर व्यक्ति के दिल में है।
प्रश्न - सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पीएम मोदी आजादी के बाद एक ऐसे पीएम के रूप में उभरेें है, जिनके नेतृत्व मेेें देश के लेाग एवं उसकी सीमाऐं सुरक्षित है?
उत्तर - इसमें कोई दो राय नहीं है कि हाल ही मेें किया गया सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए पाकिस्तान को यह संदेश दिया गया हैं कि यदि तुम हमारे सीमाओं में हरकत करेागें, तो ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाएगा। हमारे देश के जांबाज सैनिकों पर पूरे देश को गर्व है। माननीय प्रधानमंत्री जी ने यह साबित कर दिया है कि भले ही आज सरदार बल्लभ भाई पटेल हमारे बीच में नहीं है। लेकिन लौह पुरूष के रूप में वह सब कुछ वैसा ही कर रहे है, जैसा श्री पटेल चाहते थें।
प्रश्न - यदि भाजपा आपको प्रत्याशी बनाती है तो आपके पास अपने क्षेत्र के लिए क्या योजनाऐं है?
उत्तर - देखिए सबसे पहले जनता में विश्वास का माहौल पैदा करना है। आम लोग ऐसे छले गए है, जिन पर सहसा किसी बात का यकीन नहीं होता है। मैं बडबोल की भाषा का प्रयोग तो नहीं करूंगा, लेकिन इतना जरूर है कि मैं अपने क्षेत्र में ऐसे विकास का माडल तैयार करूंगा, जिससे यहां के आम जन मानस को इस बात की तसल्ली होगी कि उन्होंने जिस व्यक्ति को वोट दिया हैं यदि यह पहले आया हेाता तो यहां क्या नहीं होता। ईश्वर एवं लोगों की सद्भावनाओं ने मुझे कुछ नया करने के लिए ताकत दी तो मैं लोगों को यकीन दिलाना चाहता हुं कि उत्तराखंड विधानसभा में आप का एकमात्र विधायक ऐसा होगा जो जनता कि गाढ़ी कमाई को आम लोगों के जीवन की कठिनाईयों को दूर करने में खर्च करेगा।
प्रश्न - चंपावत जिले में तकरीबन अधिक लोग सेना में कार्यरत है। या पूर्व फौजी है इनके बारे में आप क्या सोचते है?
उत्तर - पहाड़ की हर मां की कोख से एक बच्चा देश की रक्षा के लिए पैदा होता है। देश सेवा एवं उसकी रक्षा करने का जज्बा लेागों के खून में मिला हुआ है। पूर्व सैनिक ऐसे समय में रिटायर होते है। जब उनके पास अच्छी पूंजी, स्वस्थ शरीर एवं अपने घर क्षेत्र में कुछ करने का जज्बा होता है, सेना में रहते हुए उनके पास कई हुनर होते है। जिसका आज तक कोई दोहन न कर इस शक्ति का सही मायनों में उपयोग नहीं हुआ है। इनके लिए मेरे पास काफी कार्यक्रम हैं। यह ऐसा तबका है जो क्या नहीं कर सकता। सेना पहाड़ के लोगों के शौर्य एवं पराक्रम का माध्यम तो है ही यह रोजगार का भी सशक्त माध्यम है। ईश्वर ने यदि मुझे ताकत दी तो मैं सबसे पहले युवाओं में नशे के प्रति अभियान चलाकर उन्हें सेना में भर्ती होने के मानकों के अनुरूप शारीरिक, मानसिक एवं शैक्षिक रूप से सबल करने का प्रयास करूंगा। जिससे एक बार फिर यहां के नौजवान अपनी क्षमता के बल पर सेना में भर्ती होकर देश सेवा के अलावा सम्मान के साथ अपना जीवनयापन कर सकेगें।
प्रश्न - आप उद्योगपति है। अल्पसंख्यक मुसलमान भाजपा से दूर का रिश्ता बनाए हुए है। इस समुदाय के बारे में आप क्या सोचतें है?
उत्तर - देखिए मुस्लिम भाई एक हुनरमंद लोग है। इनके पास ऐसे हुनर है कि हम उसका उपयोग नही कर पा रहे हैं स्वयं मेरे उद्योंगों में सैकड़ों मुसलमान कार्य करते है। हम ईद व दीपावली की खुशियों को आपस में मिलकर बांटते आ रहे है। हमारे नाम में फर्क हो सकता है, मन में नही। सकारात्मक विचार व्यक्ति को ताकत देते है, जबकि नकारात्मक विचार उसे कमजोर बनाते है। मुस्लिम समुदाय में शिक्षा का अभाव है। मैं उनके हुनर को शिक्षा के ज्ञान में तबदील करनें का प्रयास करुंगा तो वे स्वयं अपने पैरों में खड़े हो जाएगें। जहां तक उनकी भाजपा से दूरी का सवाल है, मेंरी समझ में माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी के मन में इस वर्ग के उत्थान के लिए जितनी जगह है, उतनी किसी अन्य प्रधानमंत्री ने नही दी है। यह तो उन लोगों ने हव्वा खड़ा किया है जो इस हुनरमंद जमात को यूज एंड थ्रो की तरह इस्तेमाल करते आ रहे है। इन्हीं मुस्लिम भाईयों ने देश की तस्वीर बदलने के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा को केंद्र में आजादी के बाद ऐतिहासिक जीत दिलाई है। मैं नहीं मानता कि वह भाजपा से दूरी रखते है। अहम बात यह है कि हमें अपने कार्यव्यवहार से उन्हें यकीन दिलाना होगा कि हम भी आपके हमदर्द है।
प्रश्न- पीएम श्री मोदी जी ने मंगलवार को राष्ट्र के नाम संदेश में देश की अर्थव्यवस्था को पटरी में लाने के लिए 500 व 1000 रुपये के बडे नोटों का प्रचलन बंद करने का जो ऐतिहासिक निर्णय लिया हैं उसे आप किस रुप में देखते है ? इसका आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर- आजादी के बाद मा. प्रधानमंत्री जी ने ऐसा क्रांतिकारी कदम उठाया है, जिसका देश को दूरगामी लाभ मिलेगा। यों कहिए कि जिस प्रकार शरीर में फोड़ा होने पर उसका आपरेशन करने के बाद उस व्यक्ति को चैन एवं राहत मिलती है। ठीक इसी प्रकार इस कदम से शुरुवाती तौर पर कुछ दिक्कतें हो सकती है। लेकिन इससे राजकोषीय घाटा कम होने मुद्रास्प्रिति व मंहगाई में कमी आने के साथ सरकार को कर के रुप में अधिक राजस्व मिलेगा, जिससे देश में आर्थिक समृद्धि व विकास का एक नया युग आने के साथ हम अपनी रक्षा सेनाओं को और सशक्त बना पाने में समर्थ होंगे।