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Uttarakhand: पटवाडांगर और एचएमटी में हाईकोर्ट के लिए उपयुक्त भूमि, एक ही स्थान पर बन सकता है HC; जानें डिटेल

Thu, 09 May 2024 01:13 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल

सार

हाईकोर्ट को नैनीताल से अन्यत्र शिफ्ट करने के लिए स्थान और भूमि की तलाश अब नए सिरे से शुरू हो गई है। हाईकोर्ट ने गौलापार के पूर्व प्रस्तावित स्थल को इसके लिए अनुपयुक्त माना है। 
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उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हाईकोर्ट को नैनीताल से अन्यत्र शिफ्ट करने के लिए स्थान और भूमि की तलाश अब नए सिरे से शुरू हो गई है। अब स्वयं हाईकोर्ट ने गौलापार के पूर्व प्रस्तावित स्थल को इसके लिए अनुपयुक्त माना है। इसके बाद हाईकोर्ट में बुधवार को हुई वार्ता के बाद हाईकोर्ट बार ने किसी स्थान का सुझाव देना है और फिर शासन को वहां भूमि तलाशनी होगी। 

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ऐसे में नैनीताल के निकट पटवाडांगर में स्थित 103 एकड़ और रानीबाग के निकट एचएमटी से राज्य सरकार को मिली 45 एकड़ (वन और राज्य सरकार की खुली भूमि मिलाकर 91 एकड़) भूमि हाईकोर्ट की स्थापना के लिए बहुत उपयुक्त हो सकती है। इनमें से किसी भी स्थान पर हाईकोर्ट बनाया जाता है तो वहां न पेड़ काटने पड़ेंगे और न ही वन मंत्रालय, एनजीटी ना किसी अन्य आपत्ति की संभावना है। इन स्थानों पर बिजली, पानी, यातायात, पार्किंग सहित समस्त सुविधाएं पहले से ही उपलब्ध हैं। यह दोनों ही जगहें सुरम्य, प्राकृतिक और शांत क्षेत्र में स्थित हैं और यहां का मौसम भी नैनीताल या हल्द्वानी के मुकाबले अच्छा है। इन स्थानों के मुख्य मार्ग से हटकर होने के कारण यहां कोर्ट का संचालन भी आसान रहेगा।


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नैनीताल-हल्द्वानी मार्ग पर नैनीताल से 12 किलोमीटर दूर स्थित पटवाडांगर में 103 एकड़ के विशाल और लगभग पांच अरब रुपये कीमत के इस बेशकीमती परिसर को 19 वर्षों से किसी भी रूप में उपयोग में नहीं लाया जा रहा है। यहां 1903 में वैक्सीन इंस्टीट्यूट की स्थापना की गई थी। वर्ष 1957 में इस संस्थान में एंटी रैबीज  और बाद में टिटनेस की वैक्सीन का उत्पादन शुरू किया गया। वर्ष 1980 में विश्व से चेचक का उन्मूलन होने के बाद वर्ष 2003 तक यहां तरह-तरह की वैक्सीन बनती रहीं। बाद के वर्षों में आधुनिक तकनीक के अभाव में यहां वैक्सीन का निर्माण बंद कर दिया गया।

2005 में राज्य सरकार ने संस्थान को पंतनगर के जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय को सौंप  दिया। 15 साल तक यह संस्थान पंतनगर विवि के पास रहा लेकिन इस पर कोई कार्य नहीं किया गया। 2020 में उत्तराखंड शासन ने इसे उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद हल्दी को सौंप दिया। उधर, काठगोदाम के पास रानीबाग स्थित एचएमटी की 45.33 एकड़ विकसित भूमि और भवन केंद्र से प्रदेश सरकार को 2020 में मिले थे। यह भूमि उत्तराखंड सरकार ने केंद्रीय मंत्रालय से 72 करोड़ की राशि में खरीदी थी। पहले यह परिसर 91 एकड़ में था जिसमें 45.33 एकड़ फैक्टरी की खरीदी हुई भूमि थी। 
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शेष भूमि राज्य सरकार और वन विभाग की थी जो वापस हो चुकी है। वन विभाग की यह भूमि पुनः कोर्ट के लिए मिल सकती है और इसमें पेड़ बहुत कम होने से पर्यावरणीय स्वीकृति भी आसानी से मिल सकती है जो गौलापार में नहीं मिल पा रही थी। ये दोनों ही स्थान नैनीताल और हल्द्वानी से निकट होने के के कारण अधिकांश अधिवक्ता भी इन पर अपेक्षाकृत अधिक सहमत हो सकते हैं और कैबिनेट का पूर्व पारित निर्णय और कानून मंत्रालय की सहमति भी यहां उपयोगी हो सकती है। 

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