उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बाघ या तेंदुए के हमले में तीन लोगों की मौत मामले का खुद संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट ने मामले में एक विशेषज्ञ समिति कमेटी गठित करने और अपनी रिपोर्ट 28 दिसंबर तक देने के लिए कहा।
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भीमताल में आदमखोर बाघ या तेंदुए के हमले में तीन लोगों की मौत मामले का स्वत: संज्ञान लिया है। न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा, न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने वन विभाग से मामले में एक विशेषज्ञ समिति कमेटी गठित करने और अपनी रिपोर्ट 28 दिसंबर तक देने के लिए कहा। कोर्ट ने कहा कि आदमखोर को मारने का निर्णय लेने से पहले इसका ठोस कारण उल्लेखित किया जाए।
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कोर्ट ने क्षेत्रवासियों के सुझाव पर वाइल्ड लाइफ इंडिया के एक्सपर्ट डॉ. पराग निगम से भी सलाह लेने के निर्देश दिए। मुख्य स्थायी अधिवक्ता चंद्रशेखर रावत ने बताया कि बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान वन विभाग की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि आदमखोर टाइगर ही है। इसके हमले में ही दो महिलाओं की जान गई है।
रावत ने बताया कि संबंधित जानवर को मारने पर कोर्ट का स्टे नहीं है लेकिन दूसरे विकल्प पर विचार करने, दूसरी संभावना न होने पर प्रक्रिया के अनुरूप कोर्ट ने अग्रिम कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।
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वन सचिव के पेश न होने पर हाईकोर्ट नाराज
नैनीताल। हाईकोर्ट ने कालाढूंगी से बाजपुर के बीच किए जा रहे पेड़ों के अवैध कटान के मामले में स्वतः संज्ञान लिए जाने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने पूर्व में जारी आदेश के तहत वन सचिव के पेश न होने पर नाराजगी व्यक्त की।