उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उत्तराखंड में फर्जी बीएमएस डिग्री के प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को दस दिन के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले में अगली सुनवाई 11 मार्च की तिथि नियत की है।
गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रितु बाहरी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में मध्य प्रदेश के भोपाल निवासी सत्येंद्र मिश्रा की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। आरोप लगाया गया है कि इंडियन मेडिकल काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष डी कुमार शर्मा ने अपनी 12वीं कक्षा की फर्जी मार्कशीट के आधार पर इंडियन मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष का पद 2018 में प्राप्त किया और 2021 तक काउंसिल के अध्यक्ष बने रहे। इस दौरान एक अन्य आरोपी इमलाल खान के साथ मिलकर हजारों फर्जी बीएमसी की डिग्री का आठ से दस लाख रुपए में सौदा किया। गलत तरीके से बीएमएस डिग्री प्राप्त चिकित्सकों ने कोविड काल के दौरान उत्तराखंड के नागरिकों का गलत उपचार किया। जिससे कई रोगियों की मौत हो गई।
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याचिकाकर्ता के अधिवक्ता डा.प्रशांत पाठक व शुभांगी पाण्डे ने कोर्ट को बताया कि फर्जी बीएमसी प्रकरण के लिए गठित की गई एसआईटी की ओर से प्रकरण में मुख्य आरोपी पूर्व चेयरमैन को अवैधानिक रूप से संरक्षण दिया जा रहा है। यह भी आरोप लगाया है कि पूर्व चेयरमैन ने जिला न्यायालय देहरादून में फर्जी आवेदन पत्र लगाकर अग्रिम जमानत प्राप्त कर ली है जबकि इसी अपराध के लिए उसकी अग्रिम जमानत नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा एवं सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुकी है। इस दौरान सरकारी अधिवक्ता की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया। अब खंडपीठ ने इस मामले में 10 दिनों के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।