फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यात्रियों की जेब पर पड़ रहा डाका, दिल्ली रूट पर रोडवेज के अनुबंधित ढाबों में खुलेआम लुट रहे हैं यात्री

विज्ञापन
विज्ञापन
हल्द्वानी। दिल्ली रूट पर रोडवेज के अनुबंधित ढाबों पर यात्रियों को लूटा जा रहा है। हर वस्तु एमआरपी से पांच रुपये अधिक दामों में बेची जा रही है। ढाबों में एक-दो ब्रांडेड सामान को छोड़कर उनसे मिलते-जुलते नाम के उत्पाद बेचे जा रहे हैं। पानी से लेकर चिप्स तक लोकल कंपनियों के बिक रहे हैं।
विज्ञापन

दिल्ली जाते वक्त रोडवेज की बस सड़क के विपरीत दिशा की ओर एक ढाबे में पहुंची। इस ढाबे में जाने के लिए बस को घूमकर दूसरी साइड करीब 100 मीटर दूर आना पड़ता है। ढाबे में यात्री सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है। न तो वाटर कूलर लगा है और ना ही बैठने के लिए बेंच लगी है। खाने के लिए अंदर कुर्सियां लगी र्हुइं हैं। शौचालय के हाल खराब हैं। ब्रांडेड सामान से मिलते जुलते नाम से सामान बेचा जा रहा है। एमआरपी से पांच रुपये अधिक दाम में सामान बेचा जा रहा था।
दिल्ली से वापसी करते हुए बस दूसरे ढाबे में पहुंची। यहां भी 25 रुपये के लेज चिप्स के दाम 30 रुपये लिए जा रहे थे। जब ढाबे में काम करने वाले युवक से पूछा गया तो उसने कहा कि यहां सब माल पांच रुपये एमआरपी से महंगा है। जब उससे कहा गया कि यह तो रोडवेज का अनुबंधित ढाबा है तो उसने कहा कि बस को खड़ी करने, लाइट और शौचालय का खर्चा कौन देगा। अमूल ब्रांड फ्लेवरर्ड मिल्क में 30 रुपये दाम लिखे थे। इसे भी 35 रुपये में बेचा जा रहा था। पूरे ढाबे में ब्रांडेड पानी की बोतल नहीं थी। सब लोकल ब्रांड पानी की बोतलें थीं। शौचालय के हाल भी बहुत खराब थे।
विज्ञापन

ऐसे भी लूट रहे हैं
दो अंडे का आमलेट और दो ब्रेड के दाम 30 रुपये लिखे गए हैं। यहां भी हाथ की सफाई चल रही है। जब ब्रेड और आमलेट बनाने के लिए दुकान स्वामी से कहा गया तो उसने दो अंडे उठाए और एक अंडा फोड़कर बर्तन में डाला और दूसरे अंडे को प्लेट में छिपा दिया। जब इस बारे में पूछा गया तो जवाब मिला कि यह अंडा तो पहले से ही यहां रखा गया है।
यात्रियों की पीड़ा
वेंकटेश प्रसाद जोशी का कहना है कि रोडवेज के अनुबंधित ढाबों में यात्रियों को खुलेआम लूटा जा रहा है। हर सामान एमआरपी से पांच रुपये महंगा है। ब्रांडेड सामान के नाम पर उससे मिलते जुलते नाम के उत्पाद बेचे जा रहे हैं।
राम सिंह का कहना है कि अनुबंधित ढाबों पर उतरना यात्रियों की मजबूरी है। यहां से सामान लेना भी मजबूरी है। ढाबा संचालक इसी का फायदा उठाते हैं। कुछ कहो तो विवाद होता है और झगड़ने को आते हैं।
रोडवेज की यूनियनों का आरोप
रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम डंगवाल का कहना है कि यात्रियों की लगातार शिकायतें मिल रहीं हैं। यूनियन अनुबंधित ढाबों को निरस्त करने और इन ढाबों की जांच के लिए कई बार प्रबंधन को अवगत करा चुकी है लेकिन प्रबंधन इस मामले में आंख बंद किए हुए है।
उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष कमल पपनै का कहना है कि यूनियन कई बार इन अनुबंधित ढाबों को बंद करने व इनका औचक निरीक्षण की मांग कर चुकी है। इन ढाबों में यात्रियों और चालक परिचालकों के साथ ढाबे वाले अभद्र व्यवहार करते हैं। इनका अनुबंध निरस्त होना चाहिए।
महाप्रबंधक संचालन दीपक जैन का कहना है कि परिवहन निगम ने ढाबों के साथ अनुबंध किया है। अनुबंध के अनुसार ढाबा संचालक को यात्रियों को पानी, शौचालय की सुविधा देनी है। साथ ही एमआरपी में ही सामान बेचना है। इसकी जांच के लिए आरएम, एआरएम और रोडवेज के जांच दलों को कहा गया है। कहीं पर अनियमितता पाई जाती है तो उस ढाबे के साथ अनुबंध को खत्म किया जाएगा।
एमडी परिवहन निगम नीरज खैरवाल का कहना है कि अनुबंधित ढाबों की जांच कराएंगे। जांच में अगर यात्री सुविधा नहीं मिली और एमआरपी से अधिक दामों में उत्पाद बेचे जा रहे होंगे तो ढाबा संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें