बोहराकोट में रस्सी और पीठ पर बैठाकर फंसे लोगों को पार कराती सेना के जवान। संवाद न्यूज एजेंसी
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हल्द्वानी। तीन दिन तक हुई मूसलाधार बारिश अब भले ही थम गई हो मगर जख्म अब तक बरकरार हैं। जगह-जगह हुए भूस्खलन से मलबे में दबे शवों के मिलने का सिलसिला जारी है। जिले की कई सड़कें अब भी अवरुद्ध हैं। संचार सेवाएं ध्वस्त हैं। इस कारण के बचाव और राहत कार्य में दिक्कतें आ रही हैं। प्रशासन भले ही लोगों को निकालने का दावा कर रहा है मगर अब भी कई जगह लोग फंसे हैं।
बुधवार को पुलिस और प्रशासन की टीमों ने सेना की मदद से जगह-जगह बचाव अभियान शुरू किया। एनडीआरएफ की टीमें भी लोगों को निकलने में सक्रिय रहीं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी आपदा प्रभावितों का हाल जानने तल्ला रामगढ़ पहुंचे। इसके बाद भी अभी कई जगह बचाव कार्य शुरू नहीं हो सके हैं। मलबा आने से अवरुद्ध मार्ग और ध्वस्त संचार सेवाएं बाधा पहुंचा रही हैं।
16 सैटेलाइट फोन फिर भी संचार सेवा का रोना
हल्द्वानी। नैनीताल जिले में 16 सैटेलाइट फोन हैं। इसके बाद भी जिला प्रशासन संचार का रोना रो रहा है। मौसम विभाग की ओर से जारी आपदा के भारी अलर्ट के बाद भी जिला प्रशासन ने सूदरवर्ती इलाके पर सैटेलाइट फोन नहीं भेजे गए। थराली भेजे गए एसडीएम से भी जिला प्रशासन के अधिकारी संपर्क नहीं होने की बात कह रहे हैं। हर महीने की 14 तारीख को जिला प्रशासन को सैटेलाइट फोनों की रिपोर्ट शासन को भेजनी होती है। इसमें यह बताया जाता है कि सैटेलाइट फोन में रिचार्ज हुआ है या नहीं। सैटेलाइट फोन की बैटरी कैसी है, फोन काम कर रहा है या नहीं। इसे हर महीने जांचना भी होता है। अब सवाल उठने लाजिमी हैं। जिला प्रशासन ने दुर्गम क्षेत्रों में संचार व्यवस्था के लिए सैटेलाइट फोन भी नहीं भिजवाए। प्रशासन संचार व्यवस्था के लिए पूरी तरह निजी कंपनियों और बीएसएनएल पर निर्भर रहा। बारिश के कारण कंपनियों के नेटवर्क धड़ाम हो गए। एडीएम अशोक जोशी से जब थराली के हालात के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वहां अधिकारियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। उधर जिलाधिकारी धीराज गर्ब्याल ने कहा कि एसडीएम को सैटेलाइट फोन देकर ही भेजा गया है।