नैनीताल। रामगढ़ की जो भूमि पिछले साल तक बंजर थी उसी जमीन में आजकल सेब की पौध (नर्सरी) लहलहा रही है। यह संभव हुआ है डीएम धीराज सिंह गर्ब्याल की पहल पर। डीएम के प्रयासों के बाद रामगढ़ की इसी बंजर जमीन में अब झाड़ियों की जगह स्पर प्रजाति वाले सेब की नर्सरी तैयार हो गई है। अब काश्तकारों को स्थानीय स्तर पर ही सेब की पौध सस्ती दरों पर मिलने लगेगी। यही नहीं काश्तकार अगले एक दो साल में सेब का व्यावसायिक उत्पादन भी प्राप्त कर सकेंगे।
बता दें कि डीएम गर्ब्याल ने नैनीताल के डीएम का कार्यभार संभालने के बाद कृषि, उद्यान और पर्यटन से काश्तकारों व ग्रामीणों को स्वरोजगार से जोड़ने का निर्णय लिया और रामगढ़ में सेब की नर्सरी स्थापित करने की योजना तैयार की थी। उद्यान विभाग ने सरकारी उद्यान का चयन किया और मजदूर और जेसीबी से जमीन समतल की गई। इसके बाद हिमाचल की सबसे उन्नत प्रजाति के सेब की पौध यहां लगाई गई।
सेब के 2100 पौधे नर्सरी में लगाए
सेब की इस नर्सरी में क्लोनल रॉट स्टॉक पर 2100 पौधे लगाए गए हैं, जिसमें रेड डिलीशियस, ग्रेनी स्मिथ, गेल गाला, डेकारली, हनी क्रिस्प, हेपके गाला, शिंचो रेड, किंग रोट व जेरोमाइन मोदी, स्कारलेट स्पर 2, डार्क बैरन आदि की पौध लगाई गई है। रूट स्टॉक और मदर गार्डन को सिंचाई के लिए ड्रिप सिंचाई योजना के साथ साथ 65 हजार लीटर का टैंक भी बनाया है। पौधों को सहारा देने के लिए ट्रेलिस लगाए गए हैं। जिला प्रशासन और उद्यान विभाग के प्रयासों के बाद जिले में अपनी तरह की पहली सेब की नर्सरी बनकर तैयार हो चुकी है।
सैलानी भी कर सकेंगे सेब की नर्सरी का दीदार
नैनीताल। डीएम धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया कि रामगढ़ में स्थापित सेब की नर्सरी का सैलानी भी दीदार कर सकेंगे। रामगढ़ आने वाले सैलानियों के लिए आठ काटेज भी स्थापित करने की योजना है। साथ ही किसानों को सेब उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। बताया कि पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए आंतरिक सड़कों का विकास एवं स्थल विकास भी प्रस्तावित है। इसके अलावा पार्किंग, प्रवेश द्वार पर रेस्तरां कैफे भी बनाए जाएंगे। परियोजना के पूरा होने के बाद टिकट सिस्टम किया जाएगा ताकि इससे सरकार को भी राजस्व मिल सके।