श्रीलंका टापू: एक गांव जिसे समझा जाता है दूसरा देश
स्कूल, अस्पताल और वोट देने के लिए पार करनी पड़ती है गौला नदी
इंफो
356 है यहां की आबादी और 200 वोटर करते हैं मतदान
1985 में आई बाढ़ से खुरिया खत्ता से कट गया था यह हिस्सा
हरीश पांडे
हल्द्वानी। लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में एक गांव है श्रीलंका टापू। नाम के अनुसार इस गांव को दूसरा देश जैसा समझा जाता है और ग्रामीणों की समस्याओं का निराकरण नहीं किया जाता। हाल यह है कि स्कूल जाना हो या इलाज के लिए अस्पताल, वोट देने जाना हो या अन्य काम, लोगों को गौला नदी पार करनी पड़ती है।
गौला नदी के पार बसा यह छोटा सा गांव में विकास की बांट जोह रहा है। इस गांव की आबादी 356 है और 200 वोटर अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं। श्रीलंका टापू पहले खुरिया खत्ता के नाम से जाना जाता था। यहां खेती होती थी। गौला नदी पहले खुरिया खत्ता से हटते हुए पूरब की तरह बहती थी। बहादुर सिंह जंगी ने बताया कि 12 और 13 अक्तूबर 1985 को गौला नदी में भयंकर बाढ़ आई। नदी ने अपनी दिशा बदलते हुए खुरिया खत्ता को काटना शुरू कर दिया। खुरिया खत्ता दो भागों में बंट गया। नदी ने खुरिया खत्ता के एक भाग को टापू बना दिया। बाद में लोग इसे श्रीलंका टापू कहने लगे।
यहां पढ़ाई से लेकर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ लेने के लिए लोगों को गौला नदी में घुटनों से लेकर कमर तक पानी को पार करना पड़ता है। गांव आने-जाने वाले लोग जान खतरे में डालकर नदी पार करते हैं। नदी ने श्रीलंका टापू को कई जगह से काट दिया है। लोगों की जमीन भी बह गई है। टापू में रहने वालों का मुख्य व्यवसाय दूध और कृषि है लेकिन जंगली जानवरों ने खेती को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। लोगों ने बताया कि बरसातों में नदी में पानी का बहाव तेज होने पर किच्छा के रास्ते लालकुआं आना पड़ता है। बरसात के तीन महीने उनका बिंदुखत्ता से संपर्क पूरी तरह कट जाता है।
दिक्कतें
- बरसात में नदी का बहाव बढ़ जाने के कारण टापू का लालकुआं से कट जाता है संपर्क
- 25 किलोमीटर दूर किच्छा के रास्ते आना पड़ता है लोगों को
- बिजली की व्यवस्था अभी तक नहीं हुई। स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाओं का भी अभाव है
- बरसातों में गौला नदी से हो रहा है कटान, तटबंध तक नहीं बन पाए
ग्रामीणों की पीड़ा
गांव में स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं। स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए लोगों को तीन से 10 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। गौला नदी लगातार श्रीलंका टापू को काट रही है। आठ सालों से हम गांव के किनारे तटबंध बनाने की मांग कर रहे हैं।
-धर्म सिंह
लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि और पशुपालन है। जंगली जानवरों ने पूरी खेती बर्बाद कर दी है। इससे व्यवसाय भी प्रभावित हुआ है। नदी पार करने के लिए कोई रास्ता नहीं है। घुटनों से लेकर कंधे तक के पानी में नदी को पार करना पड़ता है।
-मंगल सिंह