नैनीताल। हाईकोर्ट ने उत्तरकाशी जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण की उस स्पेशल अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने उनके खिलाफ चल रही वित्तीय अनियमित्ताओं की जांच पर रोक लगाने की मांग की थी। मामले में सरकार की ओर से कहा गया कि जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ कमिश्नर और डीएम ने जांच कर उन्हें 15 दिन के भीतर कारण बताओ नोटिस जारी किया था लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष ने इसका जवाब नहीं दिया।
पूर्व में एकलपीठ ने याचिकाकर्ता की याचिका को इस आधार पर निरस्त कर दिया था कि याचिका पोषणीय नहीं है और मामले में जांच चल रही है।
मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार उत्तरकाशी जिला पंचायत अध्यक्ष ने हाईकोर्ट में स्पेशल अपील दायर कर एकलपीठ के आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि कुछ सदस्यों ने उनके खिलाफ मुख्यमंत्री को एक पत्र भेजकर शिकायत की थी जिसमें उन पर सरकारी धन के दुरुपयोग व करोड़ों रुपये की अनियमितता करने का आरोप लगाया गया था। मुख्यमंत्री ने जांच के लिए सचिव पंचायती राज को आदेश दिए थे। याचिका में कहा गया कि यह शिकायत उनके खिलाफ राजनीतिक दुर्भावना से की गई है। उन्होंने किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता नहीं की है। इसलिए जांच पर रोक लगाई जाए।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ने एक शिकायती पत्र पर जांच के आदेश दे दिए जबकि विभाग द्वारा ऐसा कुछ नहीं कहा गया। जांच एजेंसी ने किसी भी तरह की नियमावली का पालन नहीं किया। वहीं शिकायतकर्ता का कहना था कि जिला पंचायत अध्यक्ष ने सरकारी धन का दुरुपयोग किया है। निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग किया और करोड़ों रुपये के फर्जी निर्माण कार्य दिखाए। मजदूरों के फर्जी मस्टरोल भी भरे गए हैं।