तल्ला रामगढ़। 2013 में आई केदारनाथ आपदा में मंदिर को नुकसान नहीं पहुंचा था। ऐसा ही मंजर बीते दिनों तल्ला रामगढ़ में हुई आपदा में भी देखने को मिला है।
18 अक्तूबर को तल्ला रामगढ़ में मूसलाधार बारिश से भारी मात्रा में मलबा नदी से नीचे की ओर बहा। उसने रास्ते में आई हर चीज को अपनी चपेट में ले लिया। सकुना को जोड़ने वाला पुल मलबे की चपेट में आकर नेस्तनाबूद कर दिया। एक मकान भी तहस-नहस हो गया। तल्ला रामगढ़ में नदी के पास शनि देव का मंदिर है। मंदिर में रहने वाले नागा सन्यासी स्वामी विवेकानंद सरस्वती बताते हैं कि रात मलबा पूरे वेग से मंदिर की ओर आया लेकिन मंदिर से ठीक पहले वह दो भाग में बंट गया। मंदिर के पीछे के कमरे और आंगन में थोड़ा गाद तो भरी लेकिन मंदिर को किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ।
ये प्रकृति से छेड़छाड़ का नतीजा
मंदिर में रहने वाले स्वामी विवेकानंद सरस्वती ने आपदा को प्रकृति से छेड़छाड़ का नतीजा बताया है। उनका कहना है कि जब तक यहां से खनन नहीं रोका जाएगा, पहाड़ों को कंक्रीट के जंगल में बदलने से नहीं रोका जाएगा, इस तरह की आपदाएं आती रहेंगी। सरकार को इस ओर ध्यान देने और प्रकृति से छेड़छाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है।