अमेरिका के टेक्सास की यवेटी क्लेरी हिंदुत्व उर्फ रामरानी की फाइल फोटो
हल्द्वानी। बाबा नीब करौरी की शिष्या और हिंदुत्व पर किताबें लिख चुकीं 63 वर्षीय अमेरिकी लेखिका यवेटी क्लेरी रोजर (रामरानी) का शनिवार रात निधन हो गया। उनको कौसानी स्थित आश्रम में अस्थमा का अटैक पड़ने पर यहां एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जिला पुलिस ने इस मामले में अपनी रिपोर्ट विदेश मंत्रालय को भेज दी है।
चोरगलिया निवासी योग और ध्यान की शिक्षिका मीनाक्षी बजेठा ने बताया कि अमेरिका के टेक्सास की मूल निवासी यवेटी क्लेरी रोजर हिंदू संस्कृति से काफी प्रभावित थीं। वह कौसानी स्थित आश्रम में छह साल से रह रही थीं। वहीं मीनाक्षी का ननिहाल भी है। इसी कारण दोनों की नजदीकियां बढ़ गईं थीं। बताया कि शनिवार शाम विदेशी महिला को आश्रम में अस्थमा का अटैक पड़ा। मीनाक्षी ने उन्हें हल्द्वानी स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
मेडिकल चौकी पुलिस ने शव को मोर्चरी में रखा है। मीनाक्षी बजेठा ने बताया कि उनकी अंतिम इच्छा थी कि मौत के बाद उनका अंतिम संस्कार जागेश्वर धाम में किया जाए। उनकी बेटी टीटी शक्ति और बेटे जय हनुमान को उनकी मौत की सूचना दे दी है। दोनों सोमवार तक भारत आ जाएंगे। इसके बाद जागेश्वरधाम में उनके शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
बाबा नीब करौरी ने नाम रखा था रामरानी
यवेटी क्लेरी रोजर बाबा नीब करौरी से काफी प्रभावित थीं। वह 18 साल की उम्र से ही कैंचीधाम आती-जाती थीं। बाबा से प्रभावित होकर उन्होंने हिंदुस्तान के इतिहास विषय पर पीएचडी की। बाबा ने उनका नाम रामरानी रखा था और हिंदुत्व के प्रचार-प्रसार का भी गुरुमंत्र दिया था। तब से ही रामरानी पूजा पाठ करने लगी थी। उन्होंने हिंदुत्व पर किताबें भी लिखी हैं। सोशल मीडिया पर वह हिंदू संस्कृति का प्रचार करती थीं। हिंदू धर्म से प्रभावित होकर उन्होंने अपने बेटे का नाम जय हनुमान रखा।