हल्द्वानी में अमित कश्यप हत्याकांड का पुलिस ने सोमवार को खुलासा कर दिया। उसकी हत्या पीलीभीत निवासी अरुण कश्यप ने की थी। पुलिस ने अरुण को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर आलाकत्ल भी बरामद कर लिया है।
रामपुर रोड पर 26 नवंबर को कत्था फैक्टरी के पास हुए अमित कश्यप हत्याकांड का पुलिस ने सोमवार को खुलासा कर दिया। उसकी हत्या पीलीभीत निवासी अरुण कश्यप ने की थी। पुलिस ने अरुण को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर आलाकत्ल भी बरामद कर लिया है। हत्यारोपी अरुण मृतक अमित का न सिर्फ मौसेरा भाई है, बल्कि साढ़ू भी है।
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पुलिस बहुउद्देशीय भवन में खुलासा करते एसएसपी प्रहलाद नारायण मीणा ने बताया कि मूल रूप से पीलीभीत निवासी व वर्तमान में रामपुर रोड पर कत्था फैक्टरी के पास रहने वाले सुमेर कश्यप कत्था फैक्टरी के बाहर खाने का ठेला लगाते हैं। घटना के रोज शाम को वह बेटे अमित (30 वर्ष) को ठेले की जिम्मेदारी सौंपकर किसी काम से चले गए थे। तभी अचानक बिजली चली गई और पीछे से आए एक व्यक्ति ने अमित के सिर, चेहरे और गर्दन पर पाटल से कई वार कर दिए। घायल अवस्था में उसे अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने पड़ताल शुरू की तो पता लगा कि घटना के रोज से अमित के घर के पास देवबंधु विहार कत्था फैक्टरी में किराये पर रहने वाला अरुण कश्यप पुत्र गोपाल कश्यप गायब है, हालांकि सीसीटीवी में भागते दिख रहे आरोपी की अरुण के रूप में पहचान नहीं हो सकी। फिर भी पुलिस अरुण की तलाश में जुटी रही।
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आखिर अरुण को डी-क्लास तल्ली हल्द्वानी स्थित हनुमान मंदिर के पास से धर लिया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने घटना में इस्तेमाल पाटल भी बरामद कर लिया। पूछताछ में अरुण ने बताया कि वह मृतक अमित के पिता व अपने मौसा सुमेर से बदला लेना चाहता था। वह मौसा को अपने पिता के लापता होने और भाई की मौत का जिम्मेदार मानता है। अरुण को डर था कि अमित का पिता सुमेर उसकी हत्या कर सकता है। इस कारण उसने उसे ही मारने की योजना बना डाली।
मौसा का कत्ल करने आया था मगर अंधेरे में साढ़ू को ठिकाने लगा दिया
अरुण, अमित के पिता सुमेर की हत्या करना चाहता था, लेकिन अंधेरे में उसने अपने ही मौसेरे भाई व साढ़ू अमित को पाटल से वार कर मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने बताया कि जब सीसीटीवी की जांच की गई तो अरुण कश्यप हत्या के दिन दोपहर करीब 12:30 बजे अपने घर से निकलता दिखा। घर से बाहर उसने खूब शराब पी। इसके बाद ठेले पर देखा तो वहां सुमेर बैठा था। इसके बाद उसने मंगलपड़ाव से पाटल खरीदा।
इसके बाद फिर शराब पी और अंधेरा होने का इंतजार करने लगा। अंधेरा होने पर ठेले पर पहुंचा और पीछे से सुमेर समझकर अमित कश्यप पर कई वार कर दिए। इसके बाद फरार हो गया और आलाकत्ल फेंक दिया। वहां से वह अपने रिश्तेदार के घर काशीपुर पहुंच गया।
अरुण के गायब होने पर गहराया शक
पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि अरूण कश्यप उनका रिश्तेदार है। वह देवबंधु विहार में किराये पर रहता है। पुलिस ने सीसीटीवी की जांच की तो वह दिखाई भी दिया। उसकी पत्नी से पूछा तो उसने बताया कि वह घटना के दिन से ही गायब है। उनका फोन घर पर ही है। इसके बाद पुलिस का शक गहरा गया। पुलिस ने कई सीसीटीवी खंगाले। इसमें वह दिखाई दिया। जहां से पाटल खरीदा वहां भी सीसीटीवी फुटेज में वह दिखाई दिया।
एसएसपी ने टीम को दिया इनाम
एसएसपी प्रहलाद नारायण मीणा ने गुडवर्क करने वाली टीम को ढाई हजार रुपये इनाम की घोषणा की है। टीम में कोतवाल हरेंद्र चौधरी, एसएसआई महेंद्र प्रसाद, टीपीनगर चौकी प्रभारी सुशील जोशी, मंडी चौकी प्रभारी विजय मेहता, मंगलपड़ाव चौकी प्रभारी जगदीप नेगी, राजपुरा चौकी प्रभारी नरेंद्र कुमार, गन्ना सेंटर चौकी प्रभारी त्रिभुवन सिंह, एसआई बबिता, कास्टेबल तारा सिंह, नवीन राणा, बंशीधर जोशी, धनश्याम रौतेला, तकनीकी टीम में हेड कांस्टेबल इसरार नबी, राजेश सिंह व अनिल टम्टा थे।
अरुण को तीन दिन बाद पता चला साढ़ू को मार दिया
वारदात के बाद अरुण निसान शोरूम के बगल वाली उसी गली में भागा, जहां वह पत्नी के साथ किराये पर रहता था, लेकिन वह घर नहीं गया। उसके बाद जंगल के रास्ते वह अपने रिश्तेदारों के घर पहुंच गया। वह किच्छा में भी एक रिश्तेदार के घर गया। चूंकि उसके पास मोबाइल नहीं था तो उसे कुछ पता नहीं लगा। रिश्तेदार ने अमित की हत्या की बात अरुण को बताई तो वह सन्न रह गया। उसे अफसोस हुआ कि जिसे मारने के लिए वह गया था, उसके बजाय उसके बेटे की हत्या कर दी।
मंगलपड़ाव से 250 रुपये में खरीदा था पाटल
अरुण को लगता था कि सुमेर की वजह से उसका अपना परिवार खत्म हो गया और दांपत्य जीवन भी खराब हो रहा है। बताया जाता है कि 26 नवंबर की सुबह ही अरुण ने अचानक हत्या की योजना बनाई। वह मंगलपड़ाव पहुंचा और 250 रुपये का पाटल खरीद लाया।
दो महीने पहले मिला था हत्यारोपी के भाई का शव
पुलिस के अनुसार, हत्यारोपी अरुण कश्यप के पिता पहले ही लापता हो गए थे। दो महीने पहले अरुण के भाई की लाश पीलीभीत में एक तालाब में मिली थी। अरुण के भाई की सुमेर के परिवार से बातचीत बंद दी। अरुण इसके लिए सुमेर के परिवार से गुस्सा था और बोलचाल भी बंद थी। उसका मानना था कि उसकी पत्नी का झुकाव सुमेर के परिवार की तरफ है। भाई की मौत के बाद ही अरुण की पत्नी उसे हल्द्वानी लेकर आई थी।