ज्योलीकोट आज दर्द की घाटी बन गया है। यहां घर-घर में पीलिया ने डेरा डाल रखा है, और इस बीमारी से ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है इलाज का खर्च। लोगों की आंखों का पीलापन तो दवाओं से उतर भी जाए, पर परिजनों के चेहरे पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही हैं।
सरकारी अस्पताल में सुविधाएं न होने और प्राइवेट में सही इलाज न मिलने से लोग अपना घर, अपना गांव छोड़कर हल्द्वानी, बरेली और दिल्ली तक इलाज के लिए भटकने को मजबूर हैं। कई परिवार तो इलाज करवाकर अपनों को बचाने में कामयाब हुए, लेकिन कुछ परिवार सबकुछ खर्च करके भी अपनों को नहीं बचा पाए। अब वह सिर्फ बेबस होकर अपने हालात को कोस रहे हैं।
भाई-बहन को पीलिया, परिजन परेशान
जिले के अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा इलाज ज्योलीकोट क्षेत्र के कई लोग अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं। सभी मरीजों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। ऐसे में उनके परिजनों की चिंता और बढ़ गई है। ज्योलीकोट निवासी गौरव पाठक, गोविंद बल्लभ पाठक का इलाज कृष्णा अस्पताल, बीना बर्गली का इलाज बेस अस्पताल, गौर कुमार, महेश चंद्रा और एसके गुप्ता का इलाज हल्द्वानी में चल रहा है। इसी तरह अन्य परिवारों के लोग अलग-अलग अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। कोट... क्षेत्र में लोगों की लगातार जांच की जा रही है। उन्हें स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के सभी व्यवस्थाएं की जा रही है। मंगलवार को 80 लोगों के ब्लड सैंपल भी लिए गए हैं। इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ज्योलीकोट में निजी चिकित्सालयों के फिजिशियन एवं गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट विशेषज्ञ चिकित्सक अपनी सेवाएं प्रदान करेंगे।- डॉ. रश्मि पंत, सीएमओ
बता दें कि ज्योलीकोट क्षेत्र में बीते करीब दो माह से दूषित पानी के कारण संक्रमण फैलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। संक्रमण के चलते क्षेत्र में एक महिला और एक छात्र की मौत भी हो चुकी है। दो मौतों के बाद लोगों के आक्रोश को देखते हुए जल संस्थान और स्वास्थ्य विभाग ने क्षेत्र में निगरानी एवं जांच बढ़ाई है, लेकिन इसके बावजूद बीमारी पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है। मंगलवार को ज्योलीकोट, बेलुवाखान, वीरभट्टी, गेठिया और गांजा क्षेत्र से करीब 15 मरीज उपचार के लिए बीडी पांडे अस्पताल पहुंचे। अस्पताल की वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एमएस दुग्ताल ने बताया कि सोमवार को क्षेत्र के 11 मरीज अस्पताल में भर्ती थे। मंगलवार को तीन और मरीजों को भर्ती किया गया है। सभी भर्ती मरीजों को बेहतर उपचार दिया जा रहा है।