डेंगू मरीजों के मिलने का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार को जिले में 12 नए मरीज मिले। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में 135 मरीजों का इलाज चल रहा है, इसमें 19 एलाइजा पॉजिटिव और बाकी संदिग्ध मरीज हैं। बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
डेंगू का खतरा लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। शुक्रवार को भी जिले में कई नए मामले सामने आए हैं। डॉक्टरों का मानना है कि बदलते मौसम के साथ डेंगू से बचाव के लिए लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी होगी। अकेले सुशीला तिवारी अस्पताल में हर रोज 8 से 10 डेंगू पीड़ित बच्चे आ रहे हैं।
एसटीएच की बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ऋतु रखोलिया ने बताया कि डेंगू और डेंगू के संदिग्ध मरीज बढ़े हैं। कुछ एलाइजा पॉजिटिव और कुछ कार्ड टेस्ट के संदिग्ध डेंगू मरीज बच्चे भी भर्ती हैं। डेंगू के लक्षणों को पहचानते हुए तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। बच्चों में इस बीमारी का असर तेजी से होता है। प्लेटलेट्स कम होने लगती हैं। आमतौर पर डेंगू के लक्षण दो से सात दिन रहते हैं।
डॉ. ऋतु ने बताया कि इस बीच पानी खूब पीएं। 10 किलो वजन तक के बच्चे को चार ग्लास, 20 किलो वजन तक छह ग्लास पानी प्रतिदिन पीना चाहिए। हर चार-पांच घंटे में पानी पीना चाहिए। बच्चों को मच्छरदानी में सुलाना चाहिए। डेंगू के मरीज को भी अलग रखना चाहिए।
डेंगू के लक्षण
- बच्चों के हाथ-पांव और सिर में दर्द
- सुस्त होना
- उल्टी आना
- बुखार आना
- चिड़चिड़ापन
ये सावधानियां बरतें
- बुखार आने पर डॉक्टर से परामर्श लें
- बच्चे को स्कूल न भेजें
- बुखार कम करने के लिए हल्की दवाएं लें
- हल्का खाना लें