नैनीताल जिले में बाजारों और सड़कों में घूमते मानसिक विक्षिप्त लोगों और आवारा जानवरों से आम जनता को जल्द मुक्ति मिलेगी। पिछले दिनों गौला पुल में मानसिक विक्षिप्त महिला के एक मासूम को पुल से नीचे फेंकने की घटना के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है।
जिलाधिकारी ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से 15 दिन के भीतर जिले में घूमने वाले मानसिक विक्षिप्त लोगों को चिह्नित कर उनका मेडिकल कराने के बाद देहरादून में सेलाकुई स्थित मानसिक रोगी अस्पताल भेजने के आदेश दिए हैं।
नैनीताल जिले में विक्षिप्त लोगों की संख्या काफी अधिक है। इसकी वजह काठगोदाम आखिरी रेलवे स्टेशन का होना है। मुरादाबाद, रामपुर और बरेली के अधिकतर मानसिक विक्षिप्त लोग ट्रेन में सवार होकर हल्द्वानी और काठगोदाम आ जाते हैं। उनका कोई ठौर ठिकाना नहीं होने से सड़कों और बाजार में घूमते फिरते हैं। इनमें कई विक्षिप्त चलते फिरते लोगों को गाली गलौज और पत्थर मारते हैं।
हल्द्वानी और रामनगर में ऐसे विक्षिप्त लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिलाधिकारी दीपक रावत के मुताबिक विक्षिप्त लोगों को चिह्नित करने के लिए एसएसपी और सभी परगना अधिकारियों को आदेश दिए हैं। 15 दिन के भीतर सभी विक्षिप्त को पकड़कर सीएमओ मेडिकल जांच कराएंगे। जिसके बाद उन्हें देहरादून भेज दिया जाएगा।
डीएम के मुताबिक आवारा जानवरों को पकड़ने के भी नगर निकायों और स्थानीय प्रशासन को आदेश दिए हैं। पशुपालन विभाग को आदेश दिए हैं कि गौला में चलने वाले घोड़ाबुग्गी के खच्चर और घोड़ों में छल्ला लगाए जाएं। इसके बाद कोई खच्चर और घोड़ा सड़क में घूमता मिलता है तो उसके मालिक पर जुर्माना लगाया जाए।
भिखारियों को भी हटाएं
अखिल भारतीय हिंदू महासभा के नगर अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल और समाजसेवी हेमंत गोनिया ने हल्द्वानी से विक्षिप्त लोगों और भिखारियों से निजात दिलाने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने डीएम को ज्ञापन भेजा है।