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स्टेशनरी, यूनिफार्म बेचने वालों पर जांच की आंच

Tue, 07 Apr 2015 02:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी
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हल्द्वानी। स्कूल खुलने के साथ अभिभावकों की जेब हल्की होने लगी है। कापी, किताबों और यूनिफार्म बेचने वाले दुकानदार ग्राहकों की जेब ही नहीं काट रहे, बल्कि वाणिज्य कर विभाग की आंखों में धूल झोंककर टैक्स चोरी भी कर रहे हैं। स्टेशनरी और यूनिफार्म का करोड़ों रुपए का टर्नओवर है, लेकिन रिकार्ड में सब गोलमाल है। वाणिज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान ब्रांच ने कई बुकसेलरों और यूनिफार्म बेचने वालों की गोपनीय जांच शुरू कर दी है।
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स्टेशनरी पर 13.5 और यूनिफार्म की बिक्री पर पांच फीसदी टैक्स है। पांच लाख रुपए सालाना से अधिक का टर्नओवर करने वाले व्यापारियों के लिए वाणिज्य कर विभाग में पंजीकरण कराना अनिवार्य है, लेकिन हल्द्वानी में स्टेशनरी और यूनिफार्म बेचने वाले कुछ दुकानदारों को छोड़कर बाकी किसी का पंजीकरण नहीं है। स्कूलों के खुलने के साथ स्टेशनरी और यूनिफार्म बेचने वालों की चांदी कट रही हैं। दुकानदार टैक्स चोरी करने के साथ ग्राहकों की जेब काट रहे हैं। पंजीकृत और गैर पंजीकृत दुकानों में स्टेशनरी और यूनिफार्म की खरीद पर अभिभावकों को पक्का बिल नहीं दिया जा रहा है। बिल मांगने पर कई दुकानदार आनाकानी करते हैं।

वाणिज्य कर विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर प्रशासन बीएस नग्नियाल के मुताबिक स्टेशनरी में प्रिंट बुक टैक्स फ्री हैं, जबकि किताबों के अलावा बाकी स्टेशनरी पर 13.5 फीसदी टैक्स है। इसी तरह यूनिफार्म पर पांच फीसदी टैक्स है। स्कूली छात्रों के जूतों पर भी 13.5 फीसदी टैक्स है। ज्वाइंट कमिश्नर के मुताबिक दुकानदार पक्का बिल नहीं दे रहे हैं और टैक्स चोरी का माल बेच रहे हैं। ऐसे दुकानदार जांच के दायरे में हैं। एसआईबी के इशहाक खान के मुताबिक स्टेशनरी और यूनिफार्म का पक्का बिल नहीं देने की कई शिकायतें आ रही हैं। इसी आधार पर सेक्टर प्रभारी इसकी जांच कर रहे हैं। कई बड़े बुकसेलर और यूनिफार्म बेचने वाले जांच के दायरे में हैं। टैक्स चोरी की पुष्टि होने पर छापे मारे जाएंगे। टैक्स चोरी की वसूली के साथ जुर्माना भी लगाया जाएगा।
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जागरूक अभिभावक स्टेशनरी और यूनिफार्म खरीद पर पक्का बिल नहीं देने वाले दुकानदारों की विभागीय कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अभिभावकों को मात्र दुकानदार का दिया कच्चा बिल (जिसमें दुकान की मोहर और स्टेशनरी या फिर यूनिफार्म का कीमत जुड़ी हो) ही देना होगा। इसी आधार पर विभाग उक्त दुकानदार के यहां जाकर रिकार्ड तलब कर सकता है।
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- इशहाक खान, एसआईबी ब्रांच हल्द्वानी
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