रामनगर (नैनीताल)। जिला पंचायत अध्यक्षों को अब मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) लिखने का अधिकार मिल गया है। यह अधिकार रामनगर में प्रदेश के जिला पंचायत अध्यक्षों की बैठक में पंचायतीराज मंत्री ने दिए है। मंत्री का कहना है कि इससे पंचायतों के कार्यों में हीलाहवाली नहीं हो सकेगी और अधिकारी भी जिला पंचायत अध्यक्षों की उपेक्षा नहीं कर सकेंगे।
रामनगर के ढिकुली के एक रिजॉर्ट में प्रदेश के जिला पंचायत अध्यक्षों की बैठक में पंचायतीराज मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि सतत विकास लक्ष्य 2030 का स्थानीय स्तर पर कार्यान्वयन कराना होगा। इस लक्ष्य को विकास के एजेंडे में शामिल कर हासिल किया जा सकता है। सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण एवं स्थानीय चुनौतियों का समाधान तलाशने के लिए त्रिस्तरीय पंचायतों को सशक्त करना आवश्यक है। बैठक में आए सभी जिला पंचायत अध्यक्षों ने पंचायतीराज मंत्री को बताया कि जिस तरह ब्लॉक प्रमुख को बीडीओ की एसीआर लिखने का अधिकार मिला है, उसी तरह जिला पंचायत अध्यक्षों को भी मुख्य विकास अधिकारी की एसीआर लिखने का अधिकार मिलना चाहिए। आरोप लगाया कि अधिकारी जिला पंचायत अध्यक्षों की उपेक्षा करते हैं और इससे विकास कार्यों की गति धीमी होती है। पंचायतीराज मंत्री सतपाल महाराज ने घोषणा की कि अब जिला पंचायत अध्यक्ष मुख्य विकास अधिकारी की एसीआर लिखेंगे और अधिकारी पंचायत अध्यक्षों के आदेशों की अवहेलना नहीं कर सकेंगे। ऐसी ही व्यवस्था अपर मुख्य अधिकारी के लिए भी होगी।
पंचायती राज मंत्री ने ये घोषणाएं भी कीं
- जनपद स्तर पर गठित जिला अनुश्रवण समिति, जल प्रबंधन एवं स्वच्छता समिति, जिला आपदा प्रबंधन समिति, जिला साक्षरता समिति, पेयजल एवं जल संवर्धन समिति, जिला स्वास्थ्य समिति, रेडक्रास समिति में पंचायत अध्यक्षों को अध्यक्ष एवं संबंधित जिले के जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी को सदस्य सचिव के रूप में नामित करने का शासनादेश जारी किया जाएगा।
- जिला पंचायत अध्यक्षों को राज्य मंत्रियों की तरह अनुमन्य वेतन-भत्ते को जोड़ते हुए कम से कम 2 लाख रुपये मासिक दिया जाएगा। राज्य मंत्री को अनुमन्य अन्य पर्सनल स्टॉफ, टेलीफोन, प्रोटोकाल, वाहन सहित अन्य सभी सुविधाएं जिला पंचायत अध्यक्षों को देने के लिए शासनादेश जारी किया जाएगा।
- जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, उप जिलाधिकारी अथवा अन्य कोई भी जिला स्तरीय अधिकारी बिना जिला पंचायत अध्यक्षों के संज्ञान में लाए जिला पंचायत के अधिकारियों, कर्मचारियों के संदर्भ में किसी भी प्रकार की कार्रवाई के निर्देश नहीं देंगे।
- जिला पंचायत अध्यक्षों को सभी राजकीय अतिथि गृहों, निरीक्षण भवनों, विश्राम गृहों, दिल्ली और मुंबई स्थित उत्तराखंड भवनों में राज्य मंत्रियों की भांति सुविधाएं मिलेंगी।
- जिला पंचायत अध्यक्षों को विधायक, सांसद की भांति पांच लाख रुपये तक के काम कार्यादेश या कोटेशन के आधार पर कराने का अधिकार दिया जाएगा।
- जिला पंचायतों के निजी आय के स्रोतों को विकसित करने और उन्हें आर्थिक रूप से संपन्न बनाने के लिए जनपद के ग्रामीण पर्यटन क्षेत्रों, ग्रामीण क्षेत्रांतर्गत राष्ट्रीय राजमार्गों से लगी रिक्त भूमि जिला पंचायत को आवंटित की जाएगी।
इन जिलों के जिला पंचायत अध्यक्ष पहुंचे
बैठक में टिहरी से सोना सजवाण, देहरादून से मधु चौहान, उत्तरकाशी से दीपक बिजल्वाण, पौड़ी गढ़वाल से शांति देवी, रुद्रप्रयाग से अमरदेई शाह, नैनीताल से बेला तोलिया, बागेश्वर से बसंती देव, चंपावत से ज्योति राय, अल्मोड़ा से उमा बिष्ट, पिथौरागढ़ से दीपिका बोहरा पहुंचे। बैठक में पंचायतीराज निदेशक बंशीधर तिवारी, संयुक्त निदेशक राजीव कुमार नाथ त्रिपाठी भी मौजूद रहे।
हर विकासखंड में डंपिंग जोन बनाने की मांग
हल्द्वानी। राष्ट्रीय ग्राम पंचायत स्वराज अभियान के तहत पंचायतों के नवनिर्माण का संकल्पोत्सव कार्यक्रम में रामनगर पहुंचे कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज को जिला पंचायत अध्यक्ष बेला तोलिया ने जिला पंचायत की समस्याएं बताईं। इस दौरान उन्होंने मंत्री को प्रतीक चिह्न भी भेंट किया। साथ ही जिले के हर विकासखंड में कूड़ा निस्तारण के लिए डंपिंग जोन बनाने की मांग की। इसके अलावा जिला पंचायत की जमीन में निर्माण कार्य करने, पार्किंग के लिए जगह आवंटित करने आदि की मांग की। अध्यक्ष ने कहा कि कैबिनेट मंत्री ने जिला पंचायतों को सशक्त बनाने का आश्वासन दिया है। भविष्य में इसमें परिवर्तन देखने को मिलेगा। (संवाद)