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अस्कोट की धरती में ही दबकर रह गया खरबों का सोना

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पिथौरागढ़ जिले का अस्कोट कस्बा। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : PITHORAGARH
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अस्कोट (पिथौरागढ़)। अस्कोट की धरती में दबा खरबों मूल्य का सोना, चांदी सहित तमाम धातुएं मिट्टी में ही दबकर रह गईं। यदि धरती में छिपी बहुमूल्य धातुएं निकाली जाती तो हजारों लोगों को रोजगार मिलता और राज्य की माली हालत भी सुधर जाती।
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पाल राजाओं की राजधानी रहे अस्कोट की धरती में तांबा मौजूद होने की उम्मीद है। इस जानकारी के बाद मिनरल एक्प्लोरेशन कॉरपोरेशन (एमईसी) ने करीब 30 वर्षों तक खनन कर यहां से बड़ी मात्रा में धातु निकाली। इससे एक बड़े क्षेत्र को तांबे की खान के रूप में जाना जाने लगा। एमईसी ने अस्कोट कस्तूरा मृग विहार का प्रतिबंध लागू होने के बाद यहां पर खनिजों को निकालने का कार्य बंद कर दिया था। इसके बाद भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय के एक सर्वे में इस धरती के भीतर इस धरती के नीचे सोना, तांबा, चांदी, शीशा, जस्ता जैसी 1.65 लाख मीट्रिक टन धातु की मौजूदगी का पता चला। भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय के सर्वे के आधार पर वर्ष 2003 में कनाडा की आदि गोल्ड कंपनी ने अस्कोट की धरती में छुपे खजाने को निकालने की कोशिश की। इसके बाद भारत स्थित कंपनी ने सरकार से अनुमति लेकर यहां पर फिर से सर्वे किया। सर्वे की रिपोर्ट के बाद कंपनी ने यहां पर व्यापक रूप से कार्य करने का मन बनाया। अस्कोट में कंपनी ने अपना कार्यालय खोला और सर्वे के लिए बाहर से अत्याधुनिक मशीनें मंगाईं। कंपनी ने यहां पर धातुओं के खनन होने पर अस्कोट क्षेत्र में 200 करोड़ रुपये निवेश करने का निर्णय लिया। इसके बाद कंपनी ने कुछ कर्मचारी भी नियुक्त किए। धातुओं की मौजूदगी की जानकारी के लिए भूमिगत सुरंग बनाकर यहां कई किमी तक खोज की गई। सबसे बाद की सर्वे में यहां पर भूमि के अंदर सोना मिश्रित धातु की लंबी लड़ी होने की पुष्टि भी की गई है। वर्ष 2007 में कंपनी ने सरकार से खुले खनन के लिए 30 वर्ष की लीज की अनुमति मांगी लेकिन लीज की प्रक्रिया और पर्यावरणीय अनुमति मिलने सहित कई औपचारिकताएं समय से पूरी न होने पर कंपनी ने भी अपना सामान समेट लिया। इससे धातुओं का खनन शुरू होने पर बड़ी संख्या में रोजगार मिलने की उम्मीद लगा रही क्षेत्रीय जनता को भी निराशा का सामना करना पड़ा। करीब एक दशक से भी अधिक समय से धरती में छिपे इस बहुमूल्य खजाने को बाहर निकालने के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए हैं जबकि यहां पर खनन करने के लिए बाधा बना अस्कोट कस्तूरा मृग अभयारण्य का दायरा भी इस क्षेत्र से हट चुका है।
अस्कोट की धरती में बहुमूल्य धातुएं मौजूद होने की बात को राज्य सरकार और केंद्र सरकार के संज्ञान में लाया जाएगा। यदि इस दिशा में उचित पहल हुई तो बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी मिलेगा। - बिशन सिंह चुफाल, विधायक, डीडीहाट।
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प्रदूषण नियंत्रण के लिए भारत सरकार ने पर्यावरण संरक्षण संबंधी अनुमति देने में देरी कर दी। सहायक कंपनी पीबल ग्रीक कंपनी के साथ समझौता न होने के कारण यह प्रोजेक्ट बंद करना पड़ा। - डॉ. एंड्रयू नेविन, निदेशक, गोल्ड माइन कंपनी।
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