नगर निगम देनदारी के दलदल में धंस गया है। निगम को विकास कार्य नहीं, बल्कि कर्मचारियों का बकाया चुकाने के लिए ही करीब साढ़े 13 करोड़ की जरूरत हैं। इसमें पेंशन का सबसे ज्यादा बकाया पौने सात करोड़ हैं। देखा जाए तो निगम एक और सड़ांध मारता सरकारी संस्थान हो गया है जो शहर पर बोझ बन गया है।
निगम में बीते दिनों हड़ताल हुई थी। इसमें सफाई कर्मियों और लिपिक कर्मियों ने मुख्य रूप से संविदा कर्मियों को नियमित करने, बकाया वेतन दिलाने की मांग की थी। जैसे-तैसे मामला सुलझा कर काम शुरू किया गया है, पर निगम अब भी गंभीर अर्थिक संकट में है। उसने कर्मचारियों की भविष्य निधि की राशि जो एक करोड़ है, वह तक जमा नहीं किया है। कर्मचारियों के नौ तरह के बकाए हैं, जिसे चुकाने के लिए 13 करोड़ से ज्यादा की राशि चाहिए, जिसके लिए शासन को पत्र भेजकर आर्थिक मदद देने की गुहार लगाई है।
यह हैं देनदारियां
- कर्मचारियों के दो महीने का वेतन - 1 करोड़ 94 लाख
- पेंशन अंशदान - 1 करोड़ 20 लाख
- डीए एरियर (जुलाई 2014 से अक्तूबर 2014) - 18 लाख
- अवकाश नगदीकरण- एक करोड़
- एसीपी का अवशेष- 1 करोड़ 10 लाख
- सेवानिवृत्त कर्मियों का पेंशन अंशदान- 6 करोड़ 75 लाख
- भविष्य निधि की राशि - एक करोड़
- स्वच्छता समितियों का बकाया - 8 लाख 50 हजार
- संविदा कर्मियों का वेतन - 36 लाख 50 हजार
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कुल - 134401000