आश्वासनों में एक-एक कर नौ माह गुजर गए हैं और गर्मी ने दस्तक दे दी है, लेकिन अब तक नलकूपों में लगने वाले स्टेबलाइजरों के लिए दो करोड़ 36 लाख रुपए की राशि स्वीकृत नहीं हुई है। इसलिए पेयजल संकट झेलने के लिए आप फिर से तैयार रहें।
जून 2014 में गैरसैंण में हुए विधानसभा सत्र के दौरान हल्द्वानी में पेयजल संकट का मुद्दा जोरशोर से गूंजा था। जल संस्थान के अधिकारियों से ट्यूबवेल में स्टेबलाइजर लगाने का प्रस्ताव मांगा गया था। 16 जून को भेजे गए प्रस्ताव में ग्रामीण क्षेत्र के 17 और शहरी क्षेत्र के 13 नलकूपों में स्टेबलाइजर लगने थे और इस पर महज दो करोड़ 36 लाख रुपए खर्च होने थे।
इस बीच तमाम अरबों रुपए की बड़ी-बड़ी घोषणाएं तो होती रही, मगर दो करोड़ 36 लाख रुपए की राशि अब तक स्वीकृत नहीं हुई है। हाई-वोल्टेज के कारण कई ट्यूबवेल नहीं चल पा रहे हैं।
यहां लगने हैं स्टेबलाइजर
शहरी क्षेत्र :: खंडेलवाल पार्क, शीशमहल, आवास विकास, तिकोनिया, महिला डिग्री कालेज, खाम बंगला, हीरा नगर, राजपुरा प्रथम, राजपुरा द्वितीय, आजाद नगर, इंदिरा नगर, लटूरिया बाबा आश्रम और धोबीघाट।
ग्रामीण क्षेत्र :: डहरिया, ऊंचापुल, टीपी नगर, दमुवाढूंगा, मानपुर पश्चिम, देवलचौड़, आरटीओ आफिस, पनियाली, फतेहपुर, फुटकुआं, मोती नगर, तेजपुर नेगी प्रथम, तेजपुर नेगी द्वितीय, हिम्मतपुर चौम्वाल, पंचायत घर, लामाचौड़, लाखनमंडी।
नलकूपों में स्टेबलाइजर लगने की धनराशि मार्च के अंतिम सप्ताह तक स्वीकृत हो जाएगी। अप्रैल से स्टेबलाइजर लगने का काम शुरू हो जाएगा। गर्मियों में लोगों को किसी भी तरह की पेयजल समस्या से नहीं जूझना पड़ेगा। -डा. इंदिरा हृदयेश, वित्तमंत्री।