रविवार को फिर दुखद समाचार मिला। 17 नवंबर को हुए ओखलकांडा के छीड़ाखान सड़क हादसे में घायल नौ वर्षीय योगेश पनेरु ने भी रविवार तड़के हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में दम तोड़ दिया। योगेश की मौत की खबर से एक बार फिर उसके परिजनों और डालकन्या गांव में मातम छा गया।
इसी सड़क हादसे में योगेश अपने माता-पिता और भाई को गंवा चुका है। योगेश को उसी दिन सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पहले दिन से ही बच्चे की हालत गंभीर बनी हुई थी। सांस लेने में दिक्कत के चलते उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था। तमाम कोशिश के बाद भी बच्चे की जान नहीं बच सकी। मेडिकल काॅलेज के प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी ने बताया कि तड़के करीब साढ़े तीन बजे बच्चे की मौत हो गई।
इधर, ग्रामीणों ने बताया कि सड़क हादसे में योगेश का पूरा परिवार खत्म हो गया। उसके ताऊ-चाचा के परिवार के साथ ही पूरे गांव के लोग गमगीन हैं। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने योगेश की मौत पर दुख जताया। पोस्टमार्टम के बाद रानीबाग चित्रशिलाघाट पर उसका अंतिम संस्कार किया गया। चिता को मुखाग्नि योगेश के दोनों चाचाओं ने दी।
इस दौरान विधायक राम सिंह कैड़ा भी मौजूद रहे। विधायक कैड़ा ने कहा कि योगेश को बचाने के लिए डॉक्टरों की टीम जुटी हुई थी। सीएम भी नजर बनाए हुए थे। मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही मोटर मार्ग के सुधारीकरण के लिए 47 लाख से काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जल्द डामरीकरण भी किया जाएगा। धारी एसडीएम केएन गोस्वामी ने बताया कि बच्चे की मौत पर प्रशासन की संवेदना उनके परिवार के साथ है। प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को हरसंभव मदद की जाएगी।
ग्रामीणों ने उठाई थी एम्स ले जाने की मांग, किसी ने नहीं सुनी
रविवार को योगेश की मौत की खबर से जहां ओखलकांडा के ग्रामीणों में शोक की लहर है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों में घायल बच्चे को बेहतर उपचार के लिए बड़े अस्पताल में न ले जाने पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नाराजगी भी है। उनका कहना है कि बच्चे की हालत पहले दिन से ही चिंताजनक बनी हुई थी। बच्चे को एम्स या बड़े अस्पताल ले जाने की मांग उठाई थी। सरकार और प्रशासन चाहता तो उसे दिल्ली एम्स में भर्ती करा सकते थे। जहां उसे बेहतर उपचार मिल जाता, लेकिन किसी ने नहीं सुना।