ये था घटनाक्रम
आठ फरवरी को नगर निगम और प्रशासन की टीम पुलिस की मौजूदगी में मलिक के बगीचे से अतिक्रमण हटाने पहुंची थी। कार्यवाही के दौरान स्थानीय भीड़ हिंसक हो गई। भीड़ ने पत्थरबाजी और आगजनी की। बनभूलपुरा थाना भी फूंक दिया। घटना के बाद पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए हिंसा में शामिल होने के आरोप में 107 लोगों को गिरफ्तार किया। उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
सरकार ने कोर्ट को क्या बताया
निचली अदालत ने सभी आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी और डिफॉल्ट बेल देने से भी इन्कार कर दिया था। सरकार ने कोर्ट को बताया कि अतिरिक्त समय जो लगा, उसमें इनके खिलाफ सीसीटीवी के रिकॉर्ड, पेट्रोल बम और मेडिकल रिपोर्ट एकत्र करनी थी और जांच की जानी थी, इसलिए समय लगा लेकिन कोर्ट ने उनकी यह दलील नहीं मानी। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने इस मामले में आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई की और उनकी जमानत मंजूर कर ली। उधर एसएसपी प्रहलाद नारायण मीणा ने अपने पीआरओ दफ्तर में तैनात पुलिस कर्मी के माध्यम से बताया कि कोर्ट ने मानवीय आधार पर आरोपियों को जमानत दी है।े