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मां और पति अनु. जाति के फिर मैं सामान्य जाति की कैसे : सरिता

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नैनीताल। नैनीताल से भाजपा प्रत्याशी सरिता आर्या के जाति प्रमाण पत्र मामले में तीन सप्ताह में जवाब देने की मांग को तहसीलदार न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया है। न्यायालय ने सोमवार को सरिता आर्या के उपस्थित न होने पर 25 जनवरी को अपना पक्ष रखने को कहा है।
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बता दें कि पिछले दिनों हरीश राम नामक व्यक्ति ने डीएम, एसडीएम और तहसीलदार को पत्र देकर सरिता आर्या के जाति प्रमाण पत्र को गलत बताते हुए उसे निरस्त कराने की मांग की थी। शिकायतकर्ता का कहना था कि सरिता आर्या का सही नाम सरिता आनंद है जबकि उनके पिता का नाम कुलदीप आनंद है और यह सब उनके स्कूली दस्तावेजों में दर्ज है। शिकायतकर्ता का कहना था कि सरिता आर्या अनुसूचित जाति की नहीं हैं। शिकायतकर्ता ने विभिन्न उदाहरण देते हुए कहा कि सामान्य जाति के व्यक्ति की पुत्री को अनुसूचित जाति के व्यक्ति से विवाह करने से आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता।
सोमवार को भाजपा प्रत्याशी सरिता आर्या ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि विरोधी बार-बार मेरी जाति क्यों पूछ रहे हैं। कहा कि वह महिला हैं, इसलिए उन पर बिना सबूतों के निशाना साधा जा रहा है। सवालों का जवाब देते समय सरिता भावुक हो गईं और उनकी आंख से आंसू निकल आए। कहा कि वह एक बार नगर पालिका अध्यक्ष और दो बार विधायक का चुनाव लड़ चुकी हैं। हर बार अपने सभी प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए। हाईकोर्ट से जाति प्रमाण पत्र मामले में फैसला उनके पक्ष में रहा। कहा कि उनकी मां और पति अनुसूचित जाति के हैं। वह बचपन से ही भूमियाधार में रहती हैं, वहां के हर व्यक्ति को उनके बारे में पता है। शिकायतकर्ता हल्द्वानी गौलापार के निवासी हैं। वह न तो नैनीताल विधानसभा के निवासी हैं और न उन्हें यहां के बारे में कुछ पता है। यह उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश है।
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भावुक होकर रोने लगीं सरिता
नैनीताल। पत्रकारों से बातचीत करते हुए भाजपा प्रत्याशी सरिता आर्या कई बार भावुक हो गईं और रोने लगीं। उन्होंने कहा कि उनकी मां अनुसूचित जाति की थीं और मां का उनके पिता से विवाह नहीं हुआ था केवल आपसी संबंध थे। वे कभी अपने पिता के साथ नहीं रहीं बल्कि मां के साथ अनुसूचित जाति बहुल गांव में ही रहीं। पिता की संपत्ति में भी उनका कोई शेयर नहीं रहा तो पिता की जाति कैसे उनकी हो गई। हाईस्कूल के प्रमाणपत्र में भी उन्हें शिल्पकार लिखा गया है। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि एक पीसीएस अधिकारी ने उनसे शादी की। उन्होंने यह नहीं देखा कि किसकी लड़की है, क्या है। उन्होंने कहा कि मैं बार-बार यही कहूंगी कि मैं इल्लीगल बच्ची हूं। सरिता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट यह साफ कर चुका कि जिस परिवेश में बच्चा पला है उसी जाति का माना जाएगा। सरिता ने दावा किया कि जाति का मामला उनके खिलाफ एक षडयंत्र है और वह उनके खिलाफ मानहानि का दावा करेंगी।
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