दृष्टिबाधित बच्चों ने वहां के एक स्टाफ को छह महीने पहले ही बता दिया था कि श्याम धानक उनके साथ यौन शोषण कर रहा है। मामला सामने आने के बाद स्टाफ ने धानक को अलर्ट भी किया था। उसके बावजूद वह यौन शोषण से बाज नहीं आ रहा था।
इसकी जानकारी एक अन्य स्टाफ को भी थी, लेकिन धानक के खौफ के आगे उस स्टाफ ने न तो बच्चों से बातचीत की और न ही धानक को ऐसा कृत्य करने से रोका। हालांकि पूरे मामले की संस्थान में चर्चा हो गई थी। डीएम की ओर से गठित समिति के सामने स्टाफ के एक सदस्य ने यह बात बताई। समिति जल्द डीएम को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
सोमवार को डीएम की ओर से गठित समिति सुबह 11 बजे दृष्टिबाधित संस्था पहुंची। टीम तीन बजे तक वहां रही। समिति के सदस्यों ने एक-एक कर बच्चों से बात की। साथ ही स्टाफ के सदस्यों, शिक्षकों और संस्था के सदस्यों से भी अलग-अलग बात की। बच्चों से बैड टच और गुड टच के बारे में भी पूछा गया।
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, एक स्टाफ ने समिति के सदस्यों को बताया कि उन्हें बच्चों ने छह महीने पहले बताया था कि श्याम धानक उनके साथ छेड़छाड़ करता है। उन्हें गलत तरीके से छूता है। उन्हें अपने कमरे में बुलाता है। स्टाफ कर्मी ने बताया कि हमने श्याम धानक से इस बारे में बात भी की। उसे समझाने का प्रयास भी किया लेकिन उसने उनकी बातें नहीं सुनीं।
उधर, समिति के सदस्यों ने संस्था की अध्यक्ष सविता लाहोटी से बात की। पूछा कि उन्हें राशन या फंड की जरूरत तो नहीं है। इस पर उन्होंने बताया कि संस्था के पास पर्याप्त राशन और फंड है। समिति अध्यक्ष से कहा कि संस्था चलनी चाहिए।
समिति में जिला प्रोबेशन अधिकारी वर्षा आर्या, जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष आरपी पंत, खंड शिक्षा अधिकारी हरेंद्र मिश्रा, सहायक समाज कल्याण अधिकारी राहुल, स्वास्थ्य विभाग से डॉ. रेनू, डॉ. शालिनी मौजूद रहे।
सीडब्लूसी के सामने नहीं लाए जाते थे बच्चे
सूत्रों के अनुसार, बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की टीम निरीक्षण के लिए पहुंचती थी तो पीड़ित बच्चों को समिति के सामने नहीं लाया जाता था। जो बच्चे संस्था में मिलते थे, टीम उन्हीं से पूछताछ कर लौट जाती थी। बताया जा रहा है कि यहां संचालक श्याम धानक के उत्पीड़न से तीन बच्चियां परेशान थीं।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि धानक ने बच्चियों को उसकी करतूत किसी को न बताने के लिए धमकाया था। यौन शोषण के विरोध पर उन्हें पीटा जाता था और खाना भी नहीं दिया जाता था। बच्चियों के पास मोबाइल फोन या संचार का कोई साधन नहीं था और ना ही धानक ने संचार साधन उपयोग करने की अनुमति दी थी।
तीन पीड़ित बच्चियों के नाम आए सामने
जांच में तीन बच्चियों के नाम सामने आए हैं। इसमें से तीनों के परिजन उन्हें संस्था से अपने घर ले गए हैं। पुलिस ने एक पीड़िता से बात कर ली है। दो पीड़िताओं से अभी बात होनी है। पुलिस उन दोनों के परिजनों से बात करने का प्रयास कर रही है।
समिति 20 को करेगी फैसला : संस्था की अध्यक्ष ने समिति को बताया कि 20 अक्तूबर को समिति की बैठक रखी गई है। इसमें समिति धानक को लेकर फैसला करेगी। धानक की जगह किसे जिम्मेदारी दी जाए इस पर भी निर्णय होगा।