नैनीताल। हाईकोर्ट ने देहरादून के अधिवक्ता राजेश सूरी हत्याकांड की जांच दो माह में पूरी कर जांच अधिकारी (आईओ) को इसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता की बहन रीता सूरी ने कोर्ट को बताया कि उनके भाई की हत्या के छह वर्ष बीत जाने के बाद भी पुलिस मामले की जांच पूरी नहीं कर पाई है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि कुमार मलिमथ एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार देहरादून निवासी अधिवक्ता राजेश सूरी की बहन रीता सूरी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उसके भाई राजेश सूरी की हत्या 30 नवंबर 2014 को हुई थी। रीता सूरी ने बताया कि उनका भाई राजेश सूरी नैनीताल हाईकोर्ट से घोटालों से संबंधित मामलों की पैरवी कर ट्रेन से देहरादून लौट रहे थे तो उन्हें ट्रेन में जहर देकर मार दिया गया था।
इसके बाद राजेश सूरी के पास मौजूद सभी महत्वपूर्ण फाइलें गायब कर दीं गईं। मौके से केवल कपड़ों से भरा बैग मिला था। रीता सूरी ने कहा कि उनके भाई राजेश सूरी ने देहरादून के कई भ्रष्टाचार उजागर किए थे। याचिकाकर्ता का कहना था कि इनमें से एक बलवीर रोड में जज क्वार्टर घोटाला भी शामिल था, जिसमें भगीरथ कॉलोनी बनी है।
इसे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेच दिया गया था। इस पर वर्ष 2003 में तत्कालीन जिलाधिकारी राधा रतूड़ी ने संपत्ति को फर्जी पाते हुए कुर्क करने के आदेश देने के साथ ही किसी भी तरह के निर्माण पर रोक लगा दी थी। ऐसे ही मामलों की पैरवी के लिए राजेश सूरी अक्सर हाईकोर्ट आते-जाते थे और इसी दौरान उनकी हत्या कर दी गई। याचिकाकर्ता ने इस प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग की थी।