नैनीताल। कोरोना के मामले कम होने के साथ ही नैनीताल पर्यटकों के आने से गुलजार है। शहर की पार्किंग के साथ ही बाहर की पार्किंग फुल होने, सड़कों पर घंटों जाम लगने से सैलानियों के साथ ही आम शहरी को भी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। खास तौर पर सप्ताहांत में यहां हाल बेहाल हो जाता है। कई सैलानी तो नैनीताल तक पहुंच ही नहीं पाते और उन्हें चंद किलोमीटर दूर से लौटना पड़ता है। बेहतर हो सैलानी आने से पहले नैनीताल में होटलों की बुकिंग समेत दूसरी व्यवस्थाओं की पड़ताल कर लें, ताकि उन्हें यहां आने पर परेशान न होना पड़े। यदि नैनीताल पैक हो तो कुमाऊं के दूसरे दर्शनीय पर्यटन स्थल भी हैं, जो उनके खैरमकदम के लिए तैयार हैं। वे उन स्थलों का भी रुख कर सकते हैं।
नैनीताल में सामान्य दिनों में करीब पांच हजार और सप्ताहांत (शुक्रवार से रविवार के बीच) में करीब 20 हजार से अधिक सैलानी प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। नैनीताल में कालाढूंगी रोड, हल्द्वानी रोड और भवाली रोड से प्रवेश होता है और इन्हीं सड़कों से सैलानी लौटते हैं। हालांकि यह सभी सड़कें टू लेन हैं, लेकिन रास्ते में कई जगह सैलानियों के वाहनों के आड़े-तिरछे और नो पार्किंग जोन में खड़े होने से जाम की स्थिति पैदा हो जाती है। इसी जाम के कारण रविवार को सैलानियों को आधा घंटे का सफर पूरा करने में चार से पांच घंटे लग गए थे। जैसे-तैसे नैनीताल पहुंचे सैलानियों को नगर के पार्किंग स्थल पैक मिले तो उन्हें वाहन खड़ा करने के लिए दो-ढाई किलोमीटर दूर सूखाताल जाना पड़ा। जाम के कारण बहुत से सैलानियों को मायूस होकर लौटना भी पड़ा।
पार्किंग सुविधा वाले होटल को प्राथमिकता दें सैलानी
पर्यटकों को नैनीताल आने से पहले होटलों के बारे में भी जानकारी जुटा लेनी चाहिए। यदि आप ऑनलाइन होटल बुक करते हैं तो पार्किंग सुविधा वाले होटल को प्राथमिकता दें। ऐसा कर पार्किंग की दिक्कतों से बचा जा सकता है। यदि ऑनलाइन बुकिंग नहीं करते हैं तो यहा पहुंचने के बाद होटल तलाश लें। देरी से होटल खोजा तो वह जेब पर भारी पड़ेगा। ऐसा भी संभव है कि कमरे मिलें ही नहीं, क्योंकि ज्यादा भीड़ बढ़ने पर कई बार यहां सैलानियों को अपने वाहनों में भी रात गुजारते देखा गया है।
कोविड निगेटिव रिपोर्ट भी जरूरी
सैलानी नैनीताल में प्रवेश से 72 घंटे पहले की आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट भी जरूर लाएं और कोविड नियमों का पालन करें। यदि आप विंगर और टेंपो ट्रेवलर (आठ से अधिक सीटों वाला) में नैनीताल आते हैं तो आपको पांच किलोमीटर दूर अस्थायी पार्किंग स्थलों पर ही रोक दिया जाएगा, क्योंकि शहर में ऐसे वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित है। ऐसे में नैनीताल आने के लिए टैक्सी का सहारा लेना होगा। वहीं, बारिश के मौसम में नैनीताल आते वक्त छाता या रेनकोट जरूर साथ लाएं।
पर्यटन सीजन में होने वाली दिक्कतें
-पार्किंग स्थलों का अभाव
-सड़कों पर घंटों लगने वाला जाम
-पिकनिक स्पॉट पर आधारभूत सुविधाओं की कमी
- नेटवर्क कनेक्टिविटी की दिक्कत
समस्याओं के समाधान को पहल जरूरी
- नैनीताल से लगे अन्य पर्यटक स्थलों पर जाया जा सकता है, जो मन को सुकून भी देते हैं।
- शहर से बाहर छोटे-बड़े पार्किंग स्थलों को बनाया जाए
- शहर के भीतर मल्टीस्टोरी पार्किंग बनाई जाए
- यातायात पुलिस को और अधिक मुस्तैद बनाया जाए
- अस्थायी पार्किंग और पिकनिक स्पॉट में आधारभूत सुविधाएं जुटाई जाएं।
- सैलानियों के निजी वाहनों का प्रवेश सीमित किया जाए।
- सैलानियों के दोपहिया वाहनों को भी अस्थायी पार्किंग स्थलों पर पार्क कराया जाए।
कुमाऊं के अन्य प्रमुख दर्शनीय पर्यटन स्थल
नौकुचियाताल, सातताल, मुक्तेश्वर, भीमताल, कौसानी, बैजनाथ, रानीखेत, बिनसर, चौकोड़ी, मुनस्यारी।