हल्द्वानी। बाजपुर चीनी मिल पर काली और बहुत बारीक चीनी भेजने का आरोप लगाया है। मामला तब खुला जब सस्ता गल्ला विक्रेताओं ने चीनी की गुणवत्ता देख इसे उठाने से मना कर दिया। शिकायत के बाद आरएफसी ने चीनी बांटने पर रोक लगा दी है। गोदाम इंचार्ज को सभी चीनी के कट्टों की जांच करने और खराब चीनी को अलग करने के आदेश भी दिए गए हैं। उधर बाजपुर चीनी मिल के जीएम ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले के अधिकारी की मौजूदगी में ही चीनी दी जाती है।
सोमवार को जैसे ही चीनी का उठान शुरू हुआ तो कुछ सस्ता गल्ला विक्रेताओं ने बाजपुर से आई चीनी की गुणवत्ता में सवाल उठा दिए। गोदाम में तैनात एमआई प्रमोद कुमार ने चीनी की जांच की तो चीनी के बारीक और काली होने की बात कही। इसके बाद आरएफसी ललित मोहन रयाल ने चीनी बांटने पर रोक लगाते हुए चीनी के सभी कट्टों की जांच करने और खराब चीनी के कट्टे हटाने के आदेश गोदाम इंचार्ज एसएमओ कृष्ण कुमार को दिए।
चीनी का लदान खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अधिकारी के सामने होता है। गुणवत्ता चेक करने के बाद ही अधिकारी चीनी उठान करते हैं। गोदाम से बाहर जाने के बाद चीनी की गुणवत्ता की जिम्मेदारी हमारी नहीं है। हमारी मिल में उच्च क्वालिटी की मशीन लगी है। काली चीनी आने का सवाल ही नहीं उठता।
-प्रकाश चंद जीएम बाजपुर चीनी मिल
शिकायत के बाद चीनी के बांटने पर रोक लगा दी है। सभी चीनी के कट्टों की जांच करने के लिए कहा गया है। खराब चीनी मिल को वापस की जाएगी।
-ललित मोहन रयाल, आरएफसी कुमाऊं