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कुमट्रोन कर्मी को तीन माह में दें वीआरएस की राशि, हाईकोर्ट ने हिलट्रॉन कंपनी को दिए निर्देश

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नैनीताल। हाईकोर्ट ने कुमट्रोन कर्मी को वीआरएस राशि नहीं दिए जाने के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद हिल्ट्रॉन कंपनी को आदेश दिया है कि वह याचिकाकर्ता को 22 वर्ष से लंबित वीआरएस राशि का भुगतान तीन माह के भीतर करे।
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न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार बागेश्वर निवासी बहादुर सिंह परिहार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वह बागेश्वर में संचालित हिल्ट्रॉन और कुमाऊं मंडल विकास निगम के एक संयुक्त उपक्रम कुमट्रोन में हेल्पर के पद पर 1991 में नियुक्त हुआ था।
1993 में वह नियमित हुआ। कंपनी के बंद होने के बाद कार्य कर रहे 11 कर्मचारियों को 1998 का कोई वेतन नहीं दिया गया और 6 कर्मचारियों को अन्य विभागों में समायोजित करने का निर्णय सरकार की ओर से 5 नवंबर 2016 को लिया गया। याचिकाकर्ता समेत शेष 5 कर्मचारियों को न तो समायोजित किया गया और ना ही ऐच्छिक सेवानिवृत्ति का लाभ दिया गया।
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याचिका में कहा गया कि सरकार और कंपनी के उच्चाधिकारियों के बीच बैठक में नवंबर 2016 में सैद्धांतिक सहमति बनी कि छंटनीसुदा शेष 5 कर्मचारियों को 31 जून 2016 को कट ऑफ डेट मानते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति दे दी जाए, लेकिन याचिकाकर्ता की ओर से कई बार प्रत्यावेदन दिए जाने के बावजूद उसे वीआरएस का लाभ नहीं दिया गया। वहीं, सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि 30 सितंबर 2020 को राज्यपाल ने 5 कर्मचारियों को वीआरएस का लाभ दिए जाने की स्वीकृति प्रदान कर दी थी। बावजूद इसके उसे वीआरएस के लाभ नहीं दिए जा रहे हैं।
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