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अस्कोट में वर्ष 1909 अंग्रेजी शासनकाल में बना वन विश्राम जीर्णशीर्ण

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अस्कोट में अंग्रेजों के शासनकाल में बना वन विश्राम गृह जीर्णशीर्ण हो गया है। - फोटो : PITHORAGARH
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अस्कोट (पिथौरागढ़)। वर्ष 1909 में ब्रिटिश शासनकाल में अस्कोट में बना वन विश्राम गृह (एफआरएच) वर्ष 2016 में आई आपदा में तहस नहस हो गया था। इसके बाद भी इसके जीर्णोद्धार के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
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अस्कोट का यह एकमात्र एफआरएच था जो पूर्वी अल्मोड़ा जिले का हिस्सा था। ब्रिटिश शासनकाल में यहां कोर्ट कचहरी चलती थी। इसका आयोजन अस्कोट के रजवाड़ों की ओर से किया जाता था। रजवार अपने मेहमानों को भी यहां ठहराते थे। आजादी के बाद इन भवनों में वन विभाग अल्मोड़ा के अधिकार में आ गया। पिथौरागढ़ जिले के बनने पर इन भवनों में सरकारी कामकाज होने लगे। पोलिंग बूथ से लेकर डाकघर तक के कई कार्य होता था।
1957 से वन विभाग पिथौरागढ़ ने अपने अधीन लिया था
अस्कोट। 10 नाली से अधिक क्षेत्र में बने भवन अब खंडहर में तब्दील हो गया है। 92 वर्ष के राजेंद्र सिंह पाल कहते हैं कि यहां बगड़ क्षेत्र, गर्ख, जमतड़ी, सिरतोली, कुटा, बाजार आदि क्षेत्रों का एकमात्र पोलिंग बूथ होता था। वर्ष 1957 से वन विभाग पिथौरागढ़ ने अपने कार्यालय खोलकर इसे अपने अधीन कर लिया। यहां पर वन चेतना केंद्र भी बनाया गया।
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भवनों के जीर्णोद्धार के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। पिछले दिनों डीएफओ ने भी कार्यालय और बंगले का निरीक्षण किया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि बजट जल्द दिया जाएगा।
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- बीएस अल्मिया, वन क्षेत्राधिकारी अस्कोट।
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