दो दशकों से अधिक समय में यहां हाईकोर्ट है। राज्य की जनता भी हाईकोर्ट के साथ एडजेस्ट कर चुकी है। जब प्रांत के किसी भी हिस्से का व्यक्ति राजधानी व सचिवालय के कार्य के लिए देहरादून जा सकता है, तो उसी राज्य का व्यक्ति हाईकोर्ट क्यों नहीं आ सकता है? - संजय कुमार संजू, पूर्व पालिकाध्यक्ष नैनीताल।
हाईकोर्ट नैनीताल में ही रहना चाहिए। इसके यहां रहने से कानून का बेहतर अनुपालन हुआ है। हाईकोर्ट की पहल से लोगों को पर्यटक नगरी के प्रवेश द्वार में कूड़े के अंबार से निजात मिली है। घोड़ा स्टैंड बारापत्थर शिफ्ट होने समेत विभिन्न स्तर पर लाभ मिला।- मुकेश जोशी पूर्व पालिकाध्यक्ष नैनीताल।
दो दशक पूर्व बने राज्य में राजधानी स्थायी नहीं है, एकमात्र स्थायी संस्था हाईकोर्ट को भी विस्थापित करना उचित नहीं है। दो दशकों में हाईकोर्ट का काफी विकास हुआ है। न्यायिक जरूरत के अनुरूप और सुविधाओं के लिए समाधान निकाला जाना चाहिए। - श्याम नारायण पूर्व पालिकाध्यक्ष नैनीताल।
हाईकोर्ट नैनीताल में ही रहनी चाहिए। पूर्व में कई मंडलीय और जिला कार्यालय यहां से जा चुके हैं। हाईकोर्ट आने के बाद लोगों को रोजगार भी मिला है। शहर के पर्यटन कारोबारी, अन्य नागरिकों को विभिन्न रूप से प्रत्यक्ष व परोक्ष कई लाभ मिले हैं। - सचिन नेगी, निवर्तमान पालिकाध्यक्ष, नैनीताल।
हाईकोर्ट को विस्थापित करने की पहल तथ्यहीन है। देश के विभिन्न प्रांतों में दशकों से मौजूद यहां से कहीं अधिक पुरानी हाईकोर्ट कम स्थान पर संचालित हो रही है। अधिकारियों के टीए डीए में होने वाले खर्च के इतर नए स्थल पर हाईकोर्ट स्थापना में अरबों रुपये और खर्च होंगे। - डीएन भट्ट, नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष नैनीताल।