हल्द्वानी। जिला सैनिक कल्याण अधिकारी के प्रयास से एक और पूर्व सैनिक को 15 साल बाद पूरी पेंशन का हक मिला है।
घूसापुर चोरगलिया निवासी राजेंद्र सिंह 19 दिसंबर 1977 में 7 कुमाऊं रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। सिक्किम में तैनाती के दौरान राजेंद्र की तबियत खराब हो गई। डॉक्टरों के इलाज के बावजूद फौजी की हालत में सुधार नहीं हो सका। 27 मार्च 1981 को सेना ने अनफिट घोषित करते हुए सेना के अधिकारियों ने सिपाही को विभाग से डिस्चार्ज कर दिया। इसके बाद सिपाही को साधारण पेंशन मिलने लगी। सिपाही को वन रैंक वन पेंशन के तहत एरियर और अन्य सुविधाएं नहीं मिल रही थीं। इस मामले में उसने बैंक आफ बड़ौदा के अधिकारियों से संपर्क किया लेकिन कोई लाभ नहीं मिल सका। पिछले साल सिपाही ने जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर बीएस रौतेला से संपर्क किया। मेजर ने इस मामले में बैंक के अधिकारियों के साथ-साथ विभागीय अधिकारियों को पत्र भेजा। काफी प्रयास के बाद विभाग से पूरी पेंशन के साथ साथ एरियर भुगतान करने का आदेश मिला। बैंक अब 2003 से पूरी पेंशन के साथ एरियर प्रदान करेगा। पूर्व सैनिक का कहना था कि जिला सैनिक कल्याण अधिकारी ने पेंशन दिलाने के लिए अपना श्रम ही नहीं धन भी खर्च किया।
बैंक अधिकारियों के भ्रम को लेकर सवाल
पूर्व सैनिकों ने आरोप लगाया कि बैंक अधिकारियों के भ्रम में होने के कारण पेंशन की राशि में गड़बड़ी हुई है। राजेंद्र सिंह की तरह रमेश चंद्र चंदौला के अलावा कई दिव्यांग सैनिकों की पेंशन बैंक अधिकारियों के चलते वर्षों से रुकी थी। जिला सैनिक कल्याण अधिकारी के प्रयास से पूर्व सैनिकों को उनका हक मिल सका।