नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राघवेंद्र सिंह चौहान 24 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो जाएंगे। उनकी सेवानिवृत्ति पर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने नैनीताल क्लब में 22 दिसंबर को विदाई समारोह रखा है। हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं का कहना है कि मुख्य न्यायाधीश बहुत ही सरल स्वभाव के हैं।
24 दिसंबर 1959 को जन्मे न्यायमूर्ति आरएस चौहान ने सात जनवरी 2021 को उत्तराखंड के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी।
पेंशन से अनिवार्य कटौती समेत गई अहम फैसले दिए थे जस्टिस चौहान ने
नैनीताल। 24 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो रहे उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान कई ऐतिहासिक फैसले सुनाए। इसमें मुख्य रूप से महेंद्र भाटी हत्याकांड मामला है। सजायाफ्ता सभी अभियुक्तों को उन्होंने साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त किया। उत्तराखंड में समलैंगिक विवाह के मामले में ऊधमसिंह नगर के दो समलैंगिक युवकों के विवाह के लिए पुलिस सुरक्षा देने के निर्देश दिए थे। स्वास्थ्य बीमा के नाम पर राज्य के रिटायर कर्मचारियों की पेंशन से अनिवार्य कटौती पर उन्होंने रोक लगाई। जेलों की दशा सुधारने के लिए कई दिशा निर्देश दिए। कोविड मामले में भी महत्वपूर्ण सुनवाई कर कई दिशा निर्देश सरकार को दिए थे। उन्होंने राजनृीतिक दुर्भावना से प्रेरित मानते हुए दो जनहित याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं पर पचास-पचास हजार का जुर्माना तक लगाया था। इसी प्रकार उन्होंने कई प्रेमी युगलों को सुरक्षा दिलाई थी।
परिचय : मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान
मुख्य न्यायाधीश राघवेंद्र सिंह चौहान 1980 में अमेरिका की आर्काडिया यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी। 1983 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री हासिल करने के बाद 2005 में राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त हुए और 2015 में कर्नाटक हाईकोर्ट के न्यायाधीश बने। 2018 में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के संयुक्त हाईकोर्ट में उनकी नियुक्ति हुई थी और हाईकोर्ट के विभाजन के बाद से उन्हें तेलंगाना हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनाया गया था। सात जनवरी 2021 को वह उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने।