अव्यवस्थाओं का गढ़ बन चुके सुशीला तिवारी अस्पताल में लापरवाही से किरण जोशी की मौत का पहला मामला नहीं है। हाल ही में हुई तीन मौत और बिना इलाज के मरीज को रेफर करने की जांच रिपोर्ट गड्ढे में डाल दी गई है। आज तक जांच रिपोर्ट का पता नहीं चला पाया है और किसी के भी खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
इंदिरा नगर निवासी मो. इश्तियाक ने अपनी बच्ची को हालत बिगड़ने पर सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया था। पिछले वर्ष 23 सितंबर को डाक्टर और स्टाफ की लापरवाही के चलते बच्ची की मौत हो गई थी। बच्ची की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ था। मेडिकल कालेज चौकी इंचार्ज को डाक्टरों के खिलाफ तहरीर देने के साथ ही अस्पताल प्रशासन से भी जांच कराने को प्रार्थना पत्र दिया गया था, लेकिन सात माह बाद भी आज तक जांच रिपोर्ट नहीं आई।
पुलिस ने भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। इसी तरह लाइन नंबर 16 निवासी मो. अय्यूब (65) की 21 दिसंबर को मौत हो गई थी। परिजनों ने डाक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा कर तोड़फोड़ की थी। डाक्टरों के खिलाफ जांच का आश्वासन दिया गया। पुलिस को दोनों ओर से तहरीर दी गई थी, लेकिन वह मामला भी ठंडे बस्ते में है।
यही नहीं इंदिरा नगर निवासी सोनू ने शोएब (शिशु) को उल्टी-दस्त होने पर सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया था। नौ मार्च को शोएब की मौत हो गई थी। इस प्रकरण में भी परिजनों ने डाक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया था। एमएस (चिकित्सा अधीक्षक) डा. एके पांडेय ने जांच कराने का आश्वासन दिया था। इस मामले में भी पुलिस को तहरीर सौंपी गई थी, जांच आज तक पूरी नहीं हुई है।
अस्पताल प्रबंधन की अमानवीयता यहीं खत्म नहीं होती इस वर्ष 13 जनवरी को मुक्तेश्वर से आए घायल बच्चे को अस्पताल प्रबंधन ने भर्ती करने से मना कर दिया था। चोटिल बच्चा बिना इलाज के करीब 5:30 घंटे तड़पता रहा। मामला डीएम दीपक रावत तक पहुंचने पर उन्होंने एसडीएम को मौके पर भेज कर इलाज कराया और रेफर किया। इस मामले की भी जांच रिपोर्ट आज तक नहीं आई है। इस संबंध में प्राचार्य डा. आरसी पुरोहित से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।