वित्त मंत्री डा. इंदिरा हृदयेश ने कहा कि घायल मरीज की मौत पर सॉरी कहने वाले डाक्टरों ने पेशे को कलंकित किया है। सुशीला तिवारी अस्पताल में मंगलवार को महिला की असामयिक मौत ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूरे प्रकरण की जानकारी मुख्यमंत्री को दी जाएगी और लापरवाह डाक्टरों के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी। एसटीएच से लोगों का विश्वास उठने लगा है, यह काफी चिंता का विषय है।
वित्त मंत्री डा. हृदयेश ने कहा कि डीएम को मजिस्ट्रेटी जांच कराने के आदेश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट की एक प्रति उन्हें भी भेजने का कहा गया है, ताकि किरण के मामले में लापरवाही और असंवेदेनशीलता बरतने वाले डाक्टरों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि डाक्टरों को पहले किरण का इलाज करना चाहिए था। कई बार बहुत गंभीर मरीज भी प्रयास करने पर बच जाते हैं। वित्त मंत्री ने दो-टूक कहा कि प्राचार्य डा. आरसी पुरोहित अस्पताल और कालेज को नहीं चला पा रहे हैं।
उनको हटाने का निर्णय शासन ने कर लिया था, लेकिन कोर्ट से उन्होंने स्टे ले रखा है, जिसे सरकार वैकेट कराने में लगी है। किरण की मौत के मामले में नाराज वित्त मंत्री ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को एसटीएच और मेडिकल कालेज की कमान सौंपी जाएगी जो अपने दायित्व का निर्वहन जिम्मेदारी के साथ कर सके। उन्होंने कहा कि प्राचार्य की कमियों के चलते ही पीजी की मान्यता रद्द होने की स्थिति आ गई है। मुख्यमंत्री हरीश रावत, चिकित्सा-शिक्षा मंत्री हरक सिंह रावत से बात कर पीजी की कक्षाएं संचालित कराने का प्रयास किया जा रहा है।