स्कूल की दिनचर्या में वह अबतक पूर्ण रूप से नहीं घुल पाए हैं। उनकी आदतों में बदलाव आ गया है। ऑफलाइन कक्षाएं शुरू होने के बाद शिक्षक छात्र-छात्राओं को स्कूल की परिपाटी में लाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं।
लॉकडाउन के बीच लंबे समय तक घर पर रहने से बच्चों के सीखने की शैली पर बुरा असर पड़ा है। ऑनलाइन कक्षाओं से उनके पढ़ने का तरीका बदल गया है। वह अब अधिकतर समय मोबाइल पर गुजारने लगे हैं।
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स्कूल की दिनचर्या में वह अबतक पूर्ण रूप से नहीं घुल पाए हैं। उनकी आदतों में बदलाव आ गया है। ऑफलाइन कक्षाएं शुरू होने के बाद शिक्षक छात्र-छात्राओं को स्कूल की परिपाटी में लाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। हालांकि अब भी उनमें वे बदलाव नजर नहीं आ रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि विद्यार्थियों को पटरी पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। स्कूल की दिनचर्या में ढलने में अभी समय लगेगा।
लॉकडाउन के बीच लंबे समय तक घर पर रहने से बच्चों के सीखने की शैली प्रभावित हुई है। अनुशासन, एकाग्रता की उनमें कमी आई गई है। स्कूल खुलने बाद धीरे-धीरे उनकी आदतों में बदलाव नजर आ रहा है। कोरोना की वजह से पहले सभी बच्चें स्कूल नहीं आ रहे थे। वैक्सीन लगने के बाद का कोरोना का डर कम हुआ है। - देवकी आर्या, प्रधानाचार्य जीजीआईसी।
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स्कूल खुलने के बाद से बच्चों को स्कूल की दिनचर्या में ढालने का प्रयास किया जा रहा है। लंबे समय तक घर पर रहने के कारण उनकी आदतों में बदलाव आया है। पढ़ाई के प्रति रुचि कम हुई है। समय के साथ बदलाव आएगा। - ऋषभ जोशी, एसकेएम स्कूल, प्रबंधक।
ऑनलाइन कक्षाओं के कारण बच्चों को मोबाइल की आदत लग गई है। उनकी आदतों में बदलाव आ गया है। कक्षाओं में पढ़ाई के दौरान उनका मन नहीं लग रहा है। लिखने की गति धीमी हो गई है। शिक्षकों की कही बातों को एकदम से नहीं मान रहे हैं। बच्चों को स्कूल की परिपाटी में आने में समय लगेगा। - भावना कैड़ा, शिक्षक, एसकेएम स्कूल।