मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए सरकार ही संवेदनशील नहीं है। सुशीला तिवारी अस्पताल के लिए खरीदी जाने वाली चार मशीनों के प्रस्ताव की फाइल स्वीकृति के इंतजार में धूल फांकती रही और 80 लाख रुपए की राशि लैप्स हो गई।
सुशीला तिवारी अस्पताल कुमाऊं का सबसे बड़ा अस्पताल है। पहाड़ से लेकर मैदानी क्षेत्र के लोग यहां इलाज कराने आते हैं। मुख्यमंत्री हरीश रावत, वित्त मंत्री डा. इंदिरा हृदयेश और जिलाधिकारी दीपक रावत तक यहां छापा मार चुके हैं। मुख्यमंत्री ने व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए थे और आवश्यक उपकरणों की खरीद, अस्पताल के रखरखाव के लिए इस्टीमेट बनाकर भेजने के निर्देश जनवरी में दिए थे। उन्होंने अलग से बजट देने की भी बात कही थी।
नेत्र रोग विभाग के लिए फेको मशीन, आप्टिकल कोहैरेंस टेक्मोग्राफिक मशीन, खून की जांच के लिए आटोमेटिक एनालाइजर और पैंटाहेड माइक्रोस्कोप की खरीद होनी थी। इन मशीनों की खरीद पर 80 लाख रुपए खर्च होने थे। नवंबर 2014 में इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, मगर स्वीकृति के अभाव में फाइल ने शासन में ही दम तोड़ दिया और 80 लाख रुपए की राशि लैप्स हो गई। एसटीएच के लिए डेढ़ करोड़ रुपए से ईको और आठ लाख रुपए से इंडोस्कोपी मशीन खरीदी जानी है। इसके लिए दो दिन पूर्व टेंडर हो चुके हैं और फाइनेंसियल बिड भी हो चुकी है। एक बार फिर उक्त दोनों मशीनों की खरीद का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
बेस में धूल फांक रही है इंडोस्कोपी मशीन
लाखों रुपए की इंडोस्कोपी मशीन बेस अस्पताल में वर्षों से धूल फांक रही है। वर्ष 2005 में इंडोस्कोपी मशीन खरीदी गई थी, जो दस वर्षों से बंद पड़ी है। बेस अस्पताल में डाक्टरों की कमी के चलते इंडोस्कोपी मशीन नहीं चल पा रही है। नई मशीन में सरकारी धन की बर्बादी करने से तो अच्छा है कि बेस अस्पताल में धूल फांक रही मशीन को एसटीएच में लगाकर मरीजों के लिए शुरू कर दिया जाए।
मुझे पांच लाख रुपए तक के उपकरण खरीदने का अधिकार है, इससे अधिक की मशीन खरीदने के लिए शासन से स्वीकृति लेनी पड़ती है। नवंबर में शासन को प्रस्ताव भेजा था, मगर स्वीकृति नहीं मिलने के कारण राशि लैप्स हो गई। ईको और इंडोस्कोपी मशीन खरीदने का प्रस्ताव भी शासन को गया है। नए वित्तीय वर्ष में मशीनों की खरीद स्वीकृति मिलने पर की जाएगी।
-डा. आरसी पुरोहित, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कालेज