हल्द्वानी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद हरकत में आई प्रदेश सरकार ने स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के निर्माण का केंद्र से करार करने से पहले ही अपने खर्च को कम करने के लिए इंस्टीट्यूट के पदों में कमी कर दी है।
स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट को स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट बनाने की योजना पर तीन साल से बातचीत चल रही है। इसमें केंद्र स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट निर्माण के लिए सवा सौ करोड़ देने को तैयार है, पर राज्य सरकार को इंस्टीट्यूट के लिए डॉक्टर समेत अन्य पदों को भरने और वेतन आदि देने कर जिम्मेदारी उठानी है।
अब हाईकोर्ट की ओर से स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट को स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट का दर्जा देने और सभी संसाधनों से लैस कराने का आदेश देने के बाद शासन हरकत में आया । सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा-शिक्षा की अध्यक्षता में बीते दिनों बैठक में केंद्र के साथ एमओयू पर बातचीत हुई है। इसमें सहमति बनी है कि पूर्व में इंस्टीट्यूट के लिए डॉक्टर, नर्स, तकनीकी कर्मियोें समेत 277 पदों का प्रस्ताव है, उसमें कमी की जाए। इसके बाद कैंसर इंस्टीट्यूट के 18 अलग-अलग विभागों के लिए 195 पदों पर ही भर्ती करने का फैसला किया गया है। इसमेें 82 विभिन्न पदों को घटा दिया गया है। इंस्टीट्यूट में ही अपना ब्लड बैंक आदि सुविधाओं को भी विकसित करने पर बात हुई है।
प्रदेश सरकार ने अपना खर्च बचाने को 277 की जगह 195 पदों का प्रस्ताव किया तैयार
हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार को बनाना पड़ रहा है इंस्टीट्यूट
टीबी एंड चेस्ट रोग विभाग के पास विस्तारीकरण होगा
हल्द्वानी। प्रस्तावित स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के लिए सबसे बड़ी अड़चन भूमि को लेकर है। मामला वन भूमि को लेकर फंसा हुआ है। अधिकारियों की लापरवाही के चलते 2010 से वन भूमि हस्तांतरण संबंधी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। अब हाईकोर्ट ने आदेश किया है, तो वैकल्पिक भूमि पर विचार किया गया है। अब योजना है कि प्रस्तावित कैंसर इंस्टीट्यूट को टीबी एंड चेस्ट रोग विभाग के पास विस्तार किया जाए।
स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट निर्माण से पहले केंद्र से एमओयू होना है, उस पर बातचीत हुई है। इसी के तहत इंस्टीट्यूट के लिए पद और भूमि समेत अन्य मामलों पर बातचीत हुई है। एमओयू के बाद निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
डॉ. आशुतोष सयाना, चिकित्सा- शिक्षा निदेशक