हल्द्वानी। प्रदेश के कृषि मंत्री सुबोध उनियाल का कहना है कि प्रदेश में आर्थिक रूप से परेशान किसानों की आत्महत्याओं से वह व्यक्तिगत रूप से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि करोड़ों की जमीन के मालिक दो-चार लाख रुपये के लिए आत्महत्या करेंगे, यह समझ से परे हैं। उनकी आत्महत्या का कारण आर्थिक परेशानी नहीं बल्कि कोई और हो सकता है।
यहां राजकीय मेडिकल कॉलेज में एक कार्यक्रम में शिरकत करने आए कैबिनेट मंत्री उनियाल ने कहा कि सरकार कृषि नीति में कुछ बदलाव करने जा रही है। आज तक जो लोग किसी समस्या से कारण अपनी जमीन दूसरों को बोने के लिए नहीं देकर उसे बंजर छोड़ देते थे, उसे दूसरे को देकर बोने के लिए कानून बनाया जा रहा रहा है ताकि इसमें जमीन मालिक और जमीन को जोतने वाले के हित सुरक्षित रह सकें। बंजर जमीन पर लाभकारी और आर्थिक स्थित मजबूत करने के लिए सरकार हर्बल खेती को बढ़ावा देने जा रही है। ताकि किसानों को लाभ होेने के साथ ही जमीन बंजर नहीं पड़े। पहाड़ों में चकबंदी के सवाल पर कई बार सोचा गया लेकिन यहां सिंचित और असिंचित जमीन होने के कारण चकबंदी संभव नहीं है। सरकार ने एक बार प्रयोग भी किया लेकिन यह सफल नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर आंशिक चकबंदी पर विचार किया जा रहा है। किसानों की आत्महत्या के मामले को गंभीर मानते हुए भाजपा ने महेंद्र अधिकारी ने भी मंत्री से मामले की जांच कराने की मांग की। मंत्री ने कहा कि इस पर परीक्षण किया जा रहा है। यदि वाकई ऐसा मामला संज्ञान में आएगा तो सरकार मदद करेगी। सरकार ने किसानों की बेहतरी के लिए एक लाख रुपये के ऋण पर दो प्रतिशत ब्याज का निर्णय लिया है। किसानों के लिए इससे बेहतर क्या हो सकता है।
मंत्री जी, ये है प्रदेश की खेती का सच
-प्रदेश में दस हेक्टेयर या इससे अधिक जोत वाले किसानों का प्रतिशत कुल 3.11 प्रतिशत है। प्रदेश में एक हेक्टेयर से कम जोत वाले किसानों की संख्या कुल किसानों की संख्या का 36.23 प्रतिशत है।
-2015-16 में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 1.54 लाख आंकी गई। इस अवधि में फसल से आय 6886 रुपये प्रति किसान आंकी गई।
-2015-16 में ही खेती किसानी पर प्रदेश के कुल बजट के केवल 1.31 प्रतिशत का ही प्रावधान किया गया
-2016-17 में कृषि योजनाओं के लिए 1071 करोड़ रुपये का बजट था। इसमें से 632 करोड़ रुपये जारी किये गए और खर्च केवल 601 करोड़ रुपये हो पाए।
-2015-16 में प्रदेश में कुल मिलाकर 3679 किसानों को फसल बीमा का लाभ मिल पाया।
-प्रदेश में वास्तविक रूप से बोया गया क्षेत्रफल लगातार घट रहा है।
-चकबंदी, भू सुधार आदि पर अभी तक प्रदेश में ठोस योजना नहीं बनी
-जलवायु परिवर्तन के कारण खेती को हो रहे नुकसान की रोकथाम को सरकार के पास ठोस योजना नहीं।