हल्द्वानी। कमलुवागांजा नरसिंह मल्ला का क्षेत्रफल 19.62 हेक्टेयर है। गांव की कुल आबादी 2011 की जनसंख्या केे हिसाब से 72 लोगों की है। गांव में कहीं से भी शहरी गुण विद्यमान नहीं है। उसके बाद भी इस गांव को नगर निगम में शामिल कर दिया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि नगर निगम में शामिल करने के लिए पांच नियमों का पालन नहीं किया गया। गांव में एक राजकीय भंडार निगम का गोदाम, दो बंद पड़ी फैक्ट्री हैं। गांव के अधिकांश भाग में खेती होती है। शेष जमीन में बंजर पड़ी है। गांव के 75 प्रतिशत लोगों का व्यवसाय कृषि, पशुपालन है। गांव कहीं से भी राजस्व प्राप्ति के गुण नहीं है। 250 वर्ग किलोमीटर लोगों का नियम का भी पालन नहीं हो रहा है। उसके बाद भी राजनीतिक फायदे के लिए गांव को नगर निगम में शामिल कर लिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि नगर निगम बनने से उनका गांव भी गौजाजाली दक्षिण की तरह हो जाएगा। यहां सिंचाई गूलों में सीवर का पानी आता है और पॉलिथीन से खेत पट जाते हैं। ये ही हाल इस गांव का भी होने वाला है। आरोप लगाए कि अब सिंचाई विभाग गूलों की मरम्त नहीं कर पाएगा। निगम के पास गूलों की मरम्मत का कोई फंड नहीं होता है। ऐसे में दो साल में उनकी खेती तबाह हो जाएगी।
ये हैं चुनौतियां
- 12 किलोमीटर दूर स्ट्रीट लाइट लगाना
- सीवर और नालियों का निर्माण करना
- गांव के मूल स्वरूप बदलकर राजस्व प्राप्त करने वाला क्षेत्र बनाना
- सड़कों का निर्माण कराना
बातचीत
खेती कम है। काश्तकार टैक्स कहां से अदा करेेंगे, गांव का विकास गांव का प्रधान ही कर सकता है। अब गूलों की मरम्मत सिंचाई विभाग नहीं कर पाएगा। -बीएस बिष्ट।
नगर निगम के अंदर शामिल होने से नालियां सीवर लाइन बन जाएगी। हालांकि खेती चौपट हो जाएगी, इसका जीता जागता उदाहरण हल्द्वानी का गौजाजाली का क्षेत्र है। - मोहन चंद्र्र पांडे।
हमें निगम में शामिल होने से कोई परेशानी नहीं पर हल्द्वानी के हाल देखते हुए तो यही लगता है की निगम में आने के बाद गांव की दशा बदहाल हो जाएगी। रोज हल्द्वानी निगम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ेंगे। -दीप तिवारी
नगर निगम में तमाम तरह के टैक्स लगेंगे। अपने छोटे-छोटे काम के लिए निगम के चक्कर लगाने पड़ेंगे। गांव छोटे हैं। ग्राम प्रधान मिल जाता है। गांव को नगर निगम में शामिल करने से वार्ड बहुत बड़े हो जाएंगे। -सरोज अधिकारी