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सुप्रीम कोर्ट का फैसला, फ्लोर टेस्ट में वोट नहीं दे पाएंगे बागी विधायक

Mon, 09 May 2016 07:12 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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Supreme Court hearing - फोटो : Getty Images
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हाईकोर्ट में ‌सदस्यता निलंबन जारी रखने के बाद बागी विधायकों को सुप्रीम कोर्ट में भी राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए बागी विधायकों की सदस्यता के निलंबन को जारी रखा है। अब ये बागी विधायक फ्लोर टेस्ट में भाग नहीं ले पाएंगे।
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इससे पहले सोमवार को नैनीताल हाईकोर्ट ने बागी विधायकों की याचिका खारिज कर दी थी। जिसके बाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए बागी विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी और जल्द सुनवाई की मांग की थी। 

उधर, सुप्रीम कोर्ट की ओर से प्रधान सचिव जय देव सिंह को उत्तराखंड विधान सभा में मंगलवार को होने वाले फ्लोर टेस्ट का पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। मंगलवार को फ्लोर टेस्ट के लिए विधानसभा में मोबाइल बैन रहेगा।  इसके साथ ही सोमवार शाम चार बजे से धारा 144 लागू हो जाएगी।
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भाजपा नेता मदन कौशिक द्वारा हाईकोर्ट में बागी विधायक भीम लाल आर्य की सदस्यता निलंबन को लेकर अर्जी दाखिल की। जिसका संज्ञान लेते हुए नैनीताल हाईकोर्ट ने भाजपा के बागी विधायक भीम लाल आर्य के खिलाफ नोटिस जारी किया है। इस मामले में अगली सुनवाई 16 मई को होगी।
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27 मार्च को ही राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था

हरक स‌िंह रावत
हाईकोर्ट ने विधानसभा स्पीकर के बागी विधायकों की निलंबन के फैसले को जारी रखते हुए सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया। बता दें कि कांग्रेस के नौ बागी विधायकों ने विस स्पीकर के ‌फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में याचिका दायर की थी।इसके बाद अब विधानसभा में 62 विधायक फ्लोर टेस्ट में भाग लेंगे। 

कांग्रेस के नौ बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त करने के मामले में दायर याचिका पर हाईकोर्ट सोमवार को सवा दस बजे फैसला सुनाया गया। 7 मई शनिवार को न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की अदालत ने सात मई को दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।

बागी विधायकों की याचिका पर नौ मई का निर्णय 10 मई को होने वाले फ्लोर टेस्ट के लिए अहम साबित होगा। कांग्रेस के नौ बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त करने के मामले में हाईकोर्ट में दायर याचिका पर 7 मई शनिवार को दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी हो गई थी।

बागी विधायकों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सीए सुंदरम व दिनेश द्विवेदी ने सीएम के पत्र का हवाला देते हुए बर्खास्तगी की कार्रवाई को आधारहीन साबित करने की कोशिश की तो स्पीकर की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल व अमित सिब्बल ने वीडियो फुटेज दिखाकर नौ विधायकों के बागी होने का सबूत पेश किया था।
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