कोटद्वार। जिम्मेदार संवेदनहीन बने हुए हैं, लगता है फिर किसी बड़े नुकसान का इंतजार हो रहा है। लोग परेशानी को लेकर कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अफसरों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रहा है। लोग थक हारकर भगवान के भरोसे बैठे हैं। मामला मालन नदी से हो रहे भू-कटाव का है।
बरसात में मालन नदी से हो रहे भू-कटाव को रोकने के लिए राज्य सरकार और सिंचाई विभाग की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे लोगों को एक बार फिर बाढ़ का खतरा सता रहा है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि बाढ़ सुरक्षा कार्य शुरू करने वाले के लिए वह राज्य और केंद्र सरकार से कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
नंदपुर निवासी चंद्रमोहन कुकरेती, आरएल कुकरेती, पदमपुर निवासी यशवंत सिंह नेगी, गजेंद्र सिंह रावत, सुनीता धूलिया, प्रेम सिंह और प्रदीप बिष्ट आदि ने कहा कि वर्ष 1977 में मालन नदी में बड़ी बाढ़ आई थी, जिससे उस समय क्षेत्र के काश्तकारों की काफी कृषि भूमि बाढ़ में बह गई थी। इसके बाद प्रशासन की ओर से बाढ़ सुरक्षा के लिए लोहे के जाल, सीमेंट और कंकरीट के ब्लॉक बनाए गए थे। जिससे काश्तकारों को काफी राहत मिली थी। कहा कि वर्ष 2018 में आई बाढ़ में बहुत सारे लोहे के जॉल और सीमेंटेड ब्लॉक बह गए थे, जिससे एक बार पुन: कृषि भूमि को खासा नुकसान पहुंचा। कहा कि पिछले साल बरसात में 8 व 13 अगस्त को मालन नदी में आई बाढ़ से नदी के पूर्वी छोर में बसे वार्ड नंबर 30 व 31 में कोठला, गोरखपुर, नंदपुर, पदमपुर आदि इलाकों में कृषि भूमि का भारी कटाव हुआ। आपदा के बाद मुख्यमंत्री ने जहां क्षेत्र का हवाई दौरा किया। वहीं क्षेत्रीय विधायक एवं विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने स्थलीय निरीक्षण किया था। कहा कि नदी का रुख आबादी की ओर होने से बरसात में हर साल मालन नदी के उफान से इन क्षेत्रों में कृषि भूमि को काफी नुकसान पहुंच रहा है। सुरक्षा दीवार के अभाव में सुअर, नीलगाय और हाथी आदि जंगली जानवर भी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कहा कि वह गत लंबे समय से कोठला से पदमपुर मोटाढांक तक करीब तीन किमी सुरक्षा दीवार के निर्माण की मांग उठा रहे हैं। इसके लिए वह मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार को कई बार ज्ञापन भी भेज चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने प्रदेश सरकार से एक बार फिर मालन नदी के पूर्वी छोर पर बाढ़ सुरक्षा दीवार बनाने की मांग की है।
मालन नदी का पूरा एरिया फॉरेस्ट के अंतर्गत होने के कारण वन विभाग से एनओसी मिलने से दिक्कतें आती है। जिस पर स्वीकृत धनराशि को लौटाना पड़ता है। सिंचाई विभाग की ओर से मालन नदी में बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए कोई प्रस्ताव नहीं बनाया गया है।
- कौशद अली, अवर अभियंता सिंचाई विभाग दुगड्डा।