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सतपुली : फायर स्टेशन होता तो नहीं होता ज्यादा नुकसान, शासन में धूल फांक रहा प्रस्ताव

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सतपुली/कोटद्वार। पौड़ी जिले के केंद्र स्थल सतपुली में सोमवार रात हुए आगलगी में जलीं 12 दुकानें अपनी पीछे कई सवाल छोड़ गई हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि जिले के केंद्र सतपुली में यदि फायर स्टेशन बना होता तो इतना बड़ा नुकसान नहीं होता। कई साल से यहां फायर स्टेशन बनाने की मांग की जा रही है। अग्निशमन विभाग की ओर से सतपुली के मलेठी गांव में फायर स्टेशन के निर्माण के लिए 50 नाली भूमि चयनित कर प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, लेकिन यह प्रस्ताव अब तक शासन में धूल फांक रहा है।



सतपुली द्वारीखाल, कल्जीखाल, एकेश्वर ब्लॉक, जयहरीखाल, पोखड़ा और बीरोंखाल ब्लॉक का मुख्य बाजार है। फायर स्टेशन के अभाव में आगलगी होने की दशा में सतपुली बाजार और आसपास के पर्वतीय क्षेत्र के ग्रामीणों को कोटद्वार और पौड़ी स्थित फायर स्टेशनों पर निर्भर रहना पड़ता है। सतपुली से दोनों ही फायर स्टेशनों की दूरी अधिक होने के कारण इससे सटे पर्वतीय क्षेत्र में अग्निकांड होने की दशा में ग्रामीणों को क्षति उठानी पड़ती है। जब तक दोनों फायर स्टेशनों से दमकल की गाड़ियां पहुंचती हैं, तब तक सब कुछ जल चुका होता है। सोमवार रात को सतपुली बाजार में हुए आगलगी में भी यही कुछ देखने को मिला। घटना के करीब दो घंटे बाद कोटद्वार और पौड़ी से दमकल की गाड़ियां पहुंची, लेकिन तब तक सब कुछ जल चुका था। व्यापार मंडल के अध्यक्ष जयदीप नेगी, नगर कांग्रेस अध्यक्ष सुरजन रौतेला और प्रेम सिंह रावत आदि का कहना है कि वह वर्षों से सतपुली में फायर स्टेशन बनाने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, उन्होंने भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सतपुली में फायर स्टेशन बनाने की मांग दोहराई है।
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फायर स्टेशन के निर्माण के लिए सतपुली के मलेठी गांव में एनएच से सटी चयनित राजस्व विभाग की 50 नाली भूमि विभाग को हस्तांतरित हो चुकी है। उक्त भूमि पर फायर स्टेशन के निर्माण का प्रस्ताव पूर्व में ही शासन को भेजा जा चुका है। इस पर शासन स्तर पर कार्रवाई गतिमान है।



- आरसी गौतम, अग्निशमन अधिकारी कोटद्वार।
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