कोरोना के बढ़ते संक्रमण का असर परिवहन सेवाओं पर पड़ने लगा है। स्थिति यह है कि कई रूटों पर क्षमता से कम सवारियों में भी बसों का संचालन हो रहा है, जिससे तेल के पैसे भी नहीं निकल पा रहे हैं।
अप्रैल माह में कोरोना की रफ्तार तेज हो चली है। कोरोना की रफ्तार को देखते हुए राज्य सरकारों ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। राज्य सरकारों की सख्ती का असर परिवहन सेवाओं पर पड़ने लगा है। उत्तराखंड सरकार की ओर से गत 15 अप्रैल को जारी शासनादेश में 50 फीसदी यात्रियों के साथ सार्वजनिक वाहन (बस, थ्री व्हीलर, ई रिक्शा आदि) संचालित करने के आदेश जारी किए गए हैं, लेकिन स्थिति यह है कि पर्वतीय रूटों पर 50 फीसदी सवारियां भी नहीं मिल पा रही हैं, जिससे क्षमता से कम सवारियों में ही परिवहन निगम की बसें संचालित हो रही हैं। परिवहन निगम के अधिकारियों की मानें तो पर्वतीय रूटों पर पांच से दस यात्रियों को लेकर बसें दौड़ रही हैं, जिससे तेल के पैसे भी नहीं निकल पा रहे हैं। मंगलवार को बीरोंखाल के लिए केवल पांच सवारियां ही थी। हालांकि मैदानी रूटों पर स्थिति इसके उलट है। मैदानी क्षेत्र के राज्यों में पूर्व की भांति बसों का संचालन हो रहा है।
दिल्ली कर्फ्यू का भी पड़ रहा असर
कोटद्वार। दिल्ली में कर्फ्यू का असर भी राज्य की परिवहन सेवाओं पर पड़ रहा है। कर्फ्यू के पहले दिन 20 अप्रैल को परिवहन निगम की दिल्ली रूट पर 13 बसें और 3 अनुबंधित बसों का संचालन हुआ। जबकि सामान्य दिनों में दिल्ली रूट पर 22 से 25 बसों तक का संचालन होता है। बुधवार को दोपहर एक बजे तक केवल 9 बसों का संचालन दिल्ली रूट पर हो पाया था।
उत्तराखंड परिवहन निगम कोटद्वार डिपो के एआरएम टीकाराम आदित्य ने बताया कि मंगलवार को कुल 45 बसों का संचालन किया गया, जिसमें 31 निगम की बसें और 14 अनुबंधित बसों का संचालन विभिन्न रूटों पर किया गया। सामान्य दिनों की अपेक्षा मंगलवार को निगम की सात और अनुबंधित की 3 बसें कम संचालित की गई। रूटों पर सवारियां कम होने के कारण बसों का संचालन भी सीमित किया जा रहा है।