जयहरीखाल क्षेत्र के दर्जनों गांवों में आतंक का पर्याय बना नरभक्षी गुलदार बुधवार रात ओडल गांव में लगाए गए पिंजरे में कैद हो गया। गुलदार के पिंजरे में कैद होने की सूचना मिलते ही वन विभाग ने गुलदार को कड़ी सुरक्षा के बीच कोटद्वार होते हुए चिड़ियापुर रेस्क्यू सेंटर भिजवा दिया।
पकड़ में आया गुलदार मादा है, जिसकी उम्र तीन से चार साल के बीच है। उसके पंजों के नाखून घिसे हुए पाए गए हैं। इस आधार पर वन विभाग उसे नरभक्षी मान रहा है।
बृहस्पतिवार सुबह गुलदार के पिंजरे में फंसने की खबर लगते ही गुलदार को देखने के लिए सैकड़ों लोग ओडल गांव के उस गदेरे की ओर दौड़ पड़े, जहां गुलदार ने पांच साल की बच्ची गौरी को निवाला बनाया था।
गुलदार को ग्रामीणों के गुस्से से बचाने के लिए वन विभाग ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। लोगों के मौके पर पहुंचने से पहले ही पिंजरे को पूरी तरह से ढक दिया गया था। कड़ी सुरक्षा के बीच उसे कोटद्वार होते हुए चिड़ियापुर रेस्क्यू सेंटर भिजवा दिया गया।
गुलदार को देखने के लिए हुई नोक-झोंक
गुलदार को देखने की जिद करते हुए ग्रामीणों की एसडीओ एमके बहुखंडी और तहसीलदार शालिनी मौर्य के साथ तीखी नोकझोंक हुई। आक्रोशित ग्रामीणों ने बीआरसी तिराहे के निकट अधिकारियों का घेराव कर करीब डेढ़ घंटे तक चक्का जाम कर दिया, लेकिन अधिकारी धामधार प्रकरण के बाद किसी तरह का जोखिम लेने को तैयार नहीं थे।
उन्होंने बड़ी मुश्किल से ग्रामीणों को शांत कराकर घरों को लौटाया। घेराव करने वालों में मंजीना और ओडल गांवों के ग्रामीण शामिल थे।
डीएफओ नितिशमणि त्रिपाठी ने बताया कि गुलदार ओडल गांव के पिंजरे में कैद हुआ है, इसलिए उसे नरभक्षी माना जा रहा है। क्षेत्र में एक से अधिक गुलदारों की सक्रियता को देखते हुए फिलहाल गांव में शूटर और वन विभाग की टीम बनी रहेगी। जॉय हुकिल के साथ ही दो और प्रसिद्ध शूटर गांव में डेरा जमाए हैं।