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मालन पुल: अगले 10 दिन में शुरू हो जाएगा वेल तकनीक के पिलरों का निर्माण

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कोटद्वार। बीते वर्ष भूकटाव व बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए मालन पुल के निर्माण में जुटी लोनिवि दुगड्डा की कार्यदायी एजेंसी को बरसात के सीजन में पुल का ढांचा हटाने में पसीने छूट रहे हैं। यही वजह है कि बीते तीन माह में कार्यदायी एजेंसी केवल तीन स्लैब ही लिफ्ट कर शिफ्ट कर पाई है। इस महीने लोनिवि ने कार्यदायी एजेंसी को चार अन्य स्लैब शिफ्ट कर वेल तकनीक से प्रस्तावित पिलरों का निर्माण शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले 10 दिन में दो स्लैब हटाने के बाद पिलरों का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। बीते वर्ष 13 जुलाई, 2023 को क्षतिग्रस्त हुए मालन पुल को 13 महीने होने वाले हैं। इन 13 महीनों में मालन पार के आठ वार्डों से लेकर लालढांग तक के इलाके की करीब 50 हजार की आबादी की निगाह मालन पुल के निर्माण पर टिकी हुई हैं। बरसात के इस सीजन में वैकल्पिक मार्ग प्रभावित होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोनिवि को सुस्त गति से चल रहे निर्माण कार्य पर जवाब देना भी भारी पड़ रहा है। जिला प्रशासन से लेकर तमाम सरकारी तंत्र पुल के निर्माण में तेजी लाने का दबाव बनाए हुए हैं, लेकिन बरसात के सीजन में निर्माण कार्य तो दूर ढांचा हटाने में भी कार्यदायी एजेंसी के पसीने छूट रहे हैं। लोनिवि ने एक बार फिर पुल के स्लैब हटाने के लिए मशीनों व मैन पावर की संख्या दो गुना करने के लिए कहा है।.



लिफ्ट और शिफ्ट प्रणाली से हटाए जा चुके हैं तीन स्लैब

लोनिवि की कार्यदायी एजेंसी ने मोटाढाक बाजार वाली साइड से दोनों स्लैब को सुरक्षित हटा लिया है। इससे पहले हल्दूखाता वाली साइड का स्लैब हटाया गया। शनिवार से कार्यदायी एजेंसी ने पूरी ताकत मोटाढाक वाली साइड के दो पिलरों को हटाने पर झोंक दी है। इसके बाद पुल के वेल तकनीक के पिलरों के निर्माण के लिए खुदाई शुरू कर दी जाएगी। लोनिवि के सहायक अभियंता सत्यप्रकाश का कहना है कि अगले 10 दिन में निर्माण कार्य धरातल पर दिखने लगेगा।
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वेल तकनीक से बनने हैं सभी 12 पिलर



आईआईटी बीएचयू के वैज्ञानिकों ने मालन पुल पर बढ़ते वाहनों के दबाव, नदी के बहाव को देखते हुए पुल के सभी 12 पिलरों को वेल तकनीक से बनाने का सुझाव दिया है। इसी तकनीक पर तैयार डिजायन व डीपीआर को शासन से मंजूरी मिली है। मालन पुल पर कुल 13 स्लैब थे। जिसमें एक स्लैब नदी में गिरने से टूट गया। जो नया बनाया जाएगा। बाकी 12 स्लैब को सुरक्षित हटाकर पिलर बनने के बाद फिर से स्थापित किया जाना है। एक स्लैब की लंबाई 25 मीटर व चौड़ाई करीब 7 मीटर है। वजन भी 800 टन है, ऐसे में इन्हें दिल्ली मैट्राे पैनल की तर्ज पर लिफ्ट व शिफ्ट किया जा रहा है। अभी तेज बहाव वाले बीच के हिस्से को नहीं छेड़ा जा रहा है।
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आईआईटी बीएचयू के डिजायन के अनुसार मालन पुल का निर्माण किया जा रहा है। तीन स्लैब सुरक्षित हटा लिए जाने के बाद अन्य को हटाने का काम शुरू कर दिया गया है। साथ ही पुराने पिलर ध्वस्त करने का काम भी किए जा रहा है। नए पिलर बनाने का काम अगले सप्ताह से शुरू हो जाएगा।

-डीपी सिंह, अधिशासी अभियंता लोनिवि दुगड्डा।
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