हाईकोर्ट के आदेश पर नगर निगम प्रशासन एक बार फिर से नेशनल हाईवे के फुटपाथ और नजूल भूमि पर अतिक्रमण हटाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन अभी तक वह पूर्व में हटाए गए अतिक्रमण वाली जगह को अपने कब्जे में नहीं ले सका है। आलम यह है कि अतिक्रमण हटने के बावजूद फुटपाथों पर दुकानदारों का कब्जा बरकरार है। दुकानों से बाहर तक पसरा सामान नगर निगम और प्रशासन को मुंह चिढ़ा रहा है, जिससे अतिक्रमण हटने और फुटपॉथ का लाभ राहगीरों को नहीं मिल पा रहा है।
उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश पर दिसंबर, 2020 में एनएच पर फुटपाथ और नगर निगम की नजूल भूमि से अतिक्रमण हटाया गया था, लेकिन नगर निगम की उदासीनता के कारण उक्त जगहों पर फिर से दुकानदारों ने कब्जा कर लिया। कई दुकानदारों ने उक्त फुटपाथ पर जहां शेड बना दिए हैं, वहीं ज्यादातर ने दुकानों का सामान फैला दिया है, जिसके कारण उक्त फुटपाथ का राहगीरों और लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। पूरी तरह से अतिक्रमण न हटने के कारण शहर की यातायात व्यवस्था भी दुरुस्त नहीं हो पा रही है। पर्यटन सीजन शुरू होते ही शहर में जाम, पार्किंग की समस्या हो रही है। नागरिक मंच के अध्यक्ष सीपी नैथानी, पूर्व महासचिव डबल सिंह रावत, गोविंद डंडरियाल, राजेंद्र सिंह नेगी, कैप्टन सीपी डोबरियाल का कहना है कि पूर्व में हटाए गए अतिक्रमण वाली जगह को नगर निगम अविलंब अपने कब्जे में ले और उसे समतल करवाकर फुटपाथ विकसित करे। तभी अतिक्रमण हटाने का लाभ आम जनता को मिल सकेगा।
क्या है मामला
नवंबर, 2020 में हाईकोर्ट ने मुजीब नैथानी की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नगर निगम और जिला प्रशासन को आठ सप्ताह में एनएच पर फुटपाथ और नगर निगम की नजूल भूमि से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए। कोर्ट के आदेश पर नगर निगम प्रशासन ने नोटिस जारी किए तो अधिकांश ने एनएच के फुटपाथ से अतिक्रमण हटा लिया। इस बीच कुछ व्यापारी कोर्ट चले गए, जिससे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई थम गई। कोर्ट के आदेश पर नगर निगम ने कुछ भवन स्वामियों की फिर से सुनवाई की। मार्च, 2022 में एक बार फिर नगर निगम प्रशासन की ओर से 43 भवन स्वामियों के अतिक्रमण चिह्नित कर सुनवाई के बाद उन्हें नोटिस जारी किए और अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए। कुछ व्यापारी उक्त नोटिस के खिलाफ फिर से हाईकोर्ट गए, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली। नगर निगम प्रशासन की ओर से एक बार फिर अवशेष अतिक्रमणों को हटाने की तैयारी की जा रही है।
एनएच से अतिक्रमण हटाने के लिए जिलाधिकारी की ओर से मजिस्ट्रेट की नियुक्ति की जानी है। मजिस्ट्रेट की नियुक्ति होने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। अतिक्रमण न हटाने वाले भवन स्वामियों और संबंधित व्यापारियों से ही इसका खर्च भी वसूला जाएगा। - केएस नेगी, नगर आयुक्त कोटद्वार।