सुखरो नदी के पुल के नीचे हुए कटाव से पिलरों की सुरक्षा में जुटे लोनिवि के श्रमिक।
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भारी बारिश से उफान पर बह रही सुखरो नदी के तेज बहाव ने नदी पर बने दोनों पुलों के पिलरों पर कटाव शुरू कर दिया है। खतरे की आशंका को देखते हुए लोनिवि ने पिलर के बचाव के लिए वायरक्रेट लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। बरसात थमने के बाद स्थायी इंतजाम किए जाएंगे।
कोटद्वार क्षेत्र में सुखरो नदी पर दो डबल लेन मोटर पुल बने हुए हैं। पहला पुल कोटद्वार-भाबर रोड पर सिमलचौड़ और निंबूचौड़ के बीच करीब 385 मीटर स्पान का है। वहीं दूसरा पुल इससे करीब डेढ़ किमी नीचे बीईएल रोड पर बना है, जिसे लोग बीईएल पुल के नाम से जानते हैं। दोनों पुल कोटद्वार भाबर समेत यूपी के तल्ला मोटाढांक की दो लाख की आबादी के साथ ही सिडकुल के जशोधरपुर और सिगड्डी इंडस्ट्रियल एरिया को यातायात सुविधा से जोड़ते हैं।
पहाड़ों पर हो रही भारी बारिश से सुखरो नदी उफान पर बह रही है, जिससे नदी के तेज बहाव से दोनों पुलों के पिलर पर कटाव शुरू हो गया है। मामला संज्ञान में आने पर लोनिवि के अधिशासी अभियंता निर्भय सिंह की अगुवाई में अधिकारियों की टीम ने दोनों पुलों के पिलर पर हुए कटाव का निरीक्षण कर वायरक्रेट लगाने समेत सभी फौरी सुरक्षा इंतजाम करने के निर्देश अधीनस्थों को दिए। वहीं विभागीय टीम दोनों पुलों के नीचे सुरक्षा इंतजाम में जुट गई है। अवर अभियंता रोमा भारद्वाज ने बताया कि बीईएल पुल की ओर चल रहे खनन के कारण ऊपरी क्षेत्र में बहाव तेज हो गया है। सुखरो अपर स्ट्रीम में ग्वालगढ़ और सुखरो नदी का बरसाती पानी मिलकर सत्तीचौड़-निंबूचौड़ की तरफ कटाव कर रहा है। यहां पर नदी का बहाव एकतरफ होने के कारण पिलर की सुरक्षा पर फोकस किया गया है। वन विभाग की ओर से भी यहां पर चैनलाइजेशन (नदी से मलबा हटाना) का काम किया जा रहा है।
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सुखरो नदी के दोनों मोटर पुल के पिलर की सुरक्षा के लिए फौरी इंतजाम शुरू कर दिए गए हैं। बरसात के मौसम में वायरक्रेट लगाए जा रहे हैं। बरसात थमने के बाद स्थायी सुरक्षा प्रबंध किए जाएंगे। - निर्भय सिंह, अधिशासी अभियंता लोनिवि दुगड्डा।