कोटद्वार के ईदगाह में ईद की नमाज अदा करते लोग।
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ईद-उल-फितर का पर्व कोटद्वार, दुगड्डा और लैंसडौन में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। हजारों की संख्या में ईदगाह पहुंचकर लोगों ने अमन और तरक्की के लिए दुआएं मांगी।
जामा मस्जिद के मौलाना बदरुल इस्लाम अंसारी ने लोगों को ईद-उल-फितर की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि पवित्र रमजान के महीने में कुरान शरीफ की आयतें इस धरती पर आईं थी, जिनको रमजान के महीने में पढ़ा जाता है। इस त्योहार की सबसे बड़ी विशेषता फितरा (अपने भोजन का कुछ हिस्सा) और जकात (संपत्ति का कुछ हिस्सा) के माध्यम से असहायों और गरीबों की मदद करना है।
करीब आधा घंटे चली नमाज पूरी होने के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी। घर जाकर लोगों ने अपने मित्रों, संबंधियों के घर जाकर ईद की खुशियां बांटी। सेवइयां, खीर, फ्रूट, मिठाइयां और अन्य पकवान भी एक दूसरे को आदान-प्रदान किए। इस अवसर पर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक विजय सिंह, एसएसआई जगमोहन रमोला आदि मौजूद थे। उधर, लैंसडौन के जामा मस्जिद में लोगों ने ईद की नमाज अदा की गई। बच्चों में ईद को लेकर उत्साह देखा गया। दुगड्डा की जामा मस्जिद में मौलवी मुज्जफर हुसैन ने लोगों को मस्जिद के अंदर ईद की नमाज अदा कराई।