कोटद्वार के तिलवाढांग में हुई वन कर्मियों की आपात बैठक में शामिल पदाधिकारी।
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कालागढ़ टाइगर रिजर्व वन प्रभाग (केटीआर) में वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए दिनरात एक करने वाले वनकर्मियों ने विभाग और सरकार से बाघ के निरंतर हमलों पर चिंता जताते हुए ठोस कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि केटीआर इलाके में गश्त करने के लिए वनकर्मियों को आधुनिक उपकरणों से लैस किया जाना चाहिए। इस मौके पर मंगलवार को अदनाला रेंज में बाघ के हमले में घायल वनकर्मी को पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की गई।
बुधवार को वन विभाग के दैनिक, संविदा, आउटसोर्स कर्मचारी संगठन की तिलवाढांग वन चौकी में आपात बैठक का आयोजन किया गया। उनकी मांगों का समर्थन करते हुए राजकीय वाहन चालक महासंघ, सहायक कर्मचारी संघ, वन आरक्षी संघ के पदाधिकारियों ने भी बैठक में प्रतिभाग किया। बैठक में अदनाला रेंज के हमलावर बाघ को अन्यत्र शिफ्ट करने, केटीआर में कार्यरत वन श्रमिकों को बीट सहायक के रुप में समायोजित कर उन्हें न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये देने, दुर्गम और ढंगारी क्षेत्रों में गश्त की अनिवार्यता समाप्त कर यहां तकनीकी उपकरणों से निगरानी व्यवस्था बनाने, वन प्रभाग के अंतर्गत पैदल मार्गों को गश्त योग्य बनाने की मांग की गई।
बैठक की अध्यक्षता दैनिक, संविदा, आउटसोर्स कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने की। इस मौके पर सहायक कर्मचारी संघ केटीआर के अध्यक्ष रवींद्र देव, महामंत्री देवचरण सिंह रावत, वन आरक्षी संघ के अध्यक्ष राकेश मोहन जोशी व मंत्री त्रिलोक चंद्र तिवारी, राजकीय वाहन चालक महासंघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह, चंद्रप्रकाश, अभिषेक, भगवती प्रसाद, उमेश चंद्र, चंद्रमोहन सिंह, विपिन कुमार और अमरचंद्र आदि ने विचार रखे।